Operation Sindoor Martyred : नई दिल्ली। देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले ऑपरेशन सिंदूर के छह वीर जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए गए हैं। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार अब इन सभी शहीदों के नाम नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में स्थायी रूप से दर्ज कर दिए गए हैं। यह उन सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान का राष्ट्रीय सम्मान है, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना जीवन समर्पित किया।
पहली बार सामने आए शहीदों के नाम
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों में पांच भारतीय थल सेना और एक भारतीय वायु सेना से थे। इनमें सूबेदार मेजर पवन कुमार (25 पंजाब रेजिमेंट), राइफलमैन सुनील कुमार (4 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री), लांस नायक दिनेश कुमार शर्मा (5 फील्ड रेजिमेंट), एविएटर मूड मुरली नायक (851 लाइट रेजिमेंट), हवलदार सुनील कुमार सिंह (237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी) और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा (39 विंग, भारतीय वायु सेना) शामिल हैं। इन सभी वीर सैनिकों के नाम अब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की सम्मान सूची में हमेशा के लिए दर्ज हो चुके हैं।
नेशनल वॉर मेमोरियल में मिला सर्वोच्च सम्मान
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की वेबसाइट के ‘रोल ऑफ ऑनर’ सेक्शन में अब इन छह शहीदों के नाम भी शामिल कर दिए गए हैं। इस सम्मान सूची में अब तक कुल 26,626 शहीदों के नाम दर्ज हैं। इसमें वर्ष 1947-48 के युद्ध से लेकर हाल के सैन्य अभियानों तक देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को स्थान दिया गया है। ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों का नाम इस सूची में शामिल होना उनके साहस और बलिदान का स्थायी राष्ट्रीय सम्मान माना जा रहा है।
चार दिन तक चला था ऑपरेशन सिंदूर
मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक सैन्य संघर्ष चला था। इस दौरान भारतीय सेना के जवानों के हताहत होने की खबरें सामने आई थीं, लेकिन सरकार ने उस समय किसी भी शहीद सैनिक की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी।
अब पहली बार इन छह जवानों के नाम आधिकारिक रूप से सामने आए हैं। इससे पहले केवल अलग-अलग रिपोर्टों में शहादत का उल्लेख किया गया था, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ अभियान
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को की गई थी। यह अभियान 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी। भारतीय सशस्त्र बलों ने इसके जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े नौ ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की थी। इस अभियान में आतंकवादी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। बाद में 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी थी।