MP UCC : भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया अब तेज होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और इसके लिए गठित समिति विभिन्न वर्गों, समुदायों और विशेषज्ञों से सुझाव जुटाने में लगी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार व्यापक सहमति के आधार पर यूसीसी लागू करना चाहती है, ताकि सभी नागरिकों की भावनाओं और सुझावों का सम्मान किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित विधेयक को विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
सभी समुदायों से लिए जा रहे सुझाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती। इसी वजह से विभिन्न धर्मों, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और नागरिक समूहों से सुझाव लिए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि कानून का मसौदा ऐसा हो जो राज्य के सभी नागरिकों के हितों को ध्यान में रखे।
इसके लिए गठित समिति लगातार संवाद और अध्ययन के माध्यम से अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। माना जा रहा है कि सुझावों के आधार पर अंतिम प्रारूप को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा।
समिति की पहली बैठक में कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा
मध्य प्रदेश में यूसीसी विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित समिति की पहली बैठक 12 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। इस बैठक में समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों और उनकी परंपराओं को लेकर विचार-विमर्श किया गया। समिति ने इस बात पर भी चर्चा की कि विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक और सामाजिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया किस प्रकार तय की जाए।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनी समिति
राज्य सरकार ने यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई कर रही हैं। समिति में शत्रुघ्न सिंह, अनूप नायक, गोपाल शर्मा और बुधपाल सिंह को सदस्य बनाया गया है। समिति का दायित्व विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर राज्य सरकार को अपनी सिफारिशें देना है।
सरकार का फोकस सहमति आधारित कानून पर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी समुदाय पर कानून थोपना नहीं, बल्कि सभी वर्गों की भागीदारी के साथ एक संतुलित और व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने कहा कि सुझावों और संवाद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि व्यापक सहमति के आधार पर तैयार किया गया कानून अधिक प्रभावी और स्वीकार्य होगा।