Jabalpur Cruise Tragedy : जबलपुर। एक बच्चे के लिए मां की बांहें दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह होती हैं। चाहे तूफान आए, चाहे अंधेरा हो – की गोद में बच्चा हमेशा महफूज रहता है। लेकिन 30 अप्रैल 2026 की वह शाम बरगी डैम पर कुछ और ही लिखी थी। जबलपुर के बरगी डैम में जब पलटती क्रूज ने लोगों को मौत के मुंह में धकेला, तब एक मां ने अपने चार साल के बेटे को सीने से और कस लिया। पानी ऊपर आया, सांसें थमीं लेकिन मां की बांहें नहीं छूटीं। जब बचाव दल ने उन्हें पानी से निकाला, तो दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। मां के हाथ अब भी बच्चे की पीठ पर थे। यह तस्वीर किसी को भी तोड़ देने के लिए काफी थी। मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। यह सिर्फ एक हादसे की खबर नहीं, यह एक मां की आखिरी लड़ाई की कहानी है। अब तक इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 24 लोगों को बचा लिया गया है। लेकिन 9 लोग अभी भी लापता हैं।
बेटे को बचाने मां आखिरी सांस तक लड़ी
इस हादसे का सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब बचाव दल ने पानी से दो शव निकाले। एक मां और उसका चार साल का बेटा। दोनों के शव एक-दूसरे से चिपके हुए थे। मां के हाथ बच्चे की पीठ पर थे। ऐसा लग रहा था जैसे वह अंतिम सांस तक उसे बचाने की कोशिश करती रही।
दोनों के शरीर इस कदर जुड़े थे कि उन्हें अलग करना भी मुश्किल था। मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। वहां पहुंचे मंत्री राकेश सिंह भी भावुक हो गए। “मां ने आखिरी पल तक हार नहीं मानी। वह अपने बच्चे को बचाने के लिए लड़ती रही। लेकिन दोनों को नहीं बचाया जा सका।”
दिल्ली से पिकनिक पर आया था परिवार
यह परिवार दिल्ली से जबलपुर पिकनिक मनाने आया था। परिवार में पति, पत्नी, एक बेटा और एक बेटी थी। हादसे में पिता और बेटी किसी तरह बच गए। लेकिन मां और चार साल का बेटा क्रूज के अंदर ही फंस गए। शुक्रवार सुबह दोनों के शव बरामद हुए। एक अन्य बचाई गई लड़की ने बताया कि क्रूज अचानक पलट गया था। पानी तेजी से भर गया। उसने अपने पिता का हाथ पकड़ा और बच गई। लेकिन उसकी मां और भाई अब भी नहीं मिले हैं।
उस शाम क्या हुआ?
30 अप्रैल की शाम क्रूज बोट खमरिया टापू के पास घूम रही थी। अचानक मौसम बदला। तेज आंधी आई। हवाएं 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने लगीं। लहरें ऊंची उठीं। कुछ ही मिनटों में क्रूज का संतुलन बिगड़ा और वह डैम में पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि क्रूज में क्षमता से ज्यादा यात्री थे। जब क्रूज डगमगाने लगा तब लाइफ जैकेट दी गईं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लोगों का कहना है कि अगर क्रूज को पहले ही किनारे की तरफ मोड़ा जाता तो हादसा टाला जा सकता था।
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सीएम ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने हर मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की। राज्य सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने कंट्रोल रूम बनाया है जहां परिजनों को जानकारी दी जा रही है। SDRF, NDRF और स्थानीय बचाव दल लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। लापता लोगों की खोज अभी भी जारी है।
रेस्क्यू करने वालो का होगा 15 अगस्त को सम्मान
बरगी डैम हादसे पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि, क्रूज में लाइव जैकेट सबको पहनना ही चाहिए कुछ लोगों ने आधा अधूरा बांधा था। टूरिज्म विभाग इस मामले में जांच करेगा ताकि भविष्य में ऐसी घटना ना हो। हम परिवारों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करते हैं। जिस तेजी से बचाव कार्य में लगे हैं. उन बहादुर लोगों को बधाई देता हूं।
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सीएम ने आगे कहा कि, क्रूज को काटकरर 5 घंटे में कई लोगों को बाहर निकाला है। जिन्होंने जोखिम उठाकर लोगों को बचाने का काम किया है, उन्हें 15 अगस्त पर सम्मानित किया जाएगा। हमने एक दल बिठाया है जो पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहा है।