Indore MD Drugs Case : मध्य प्रदेश। इंदौर में चर्चित एमडी ड्रग्स मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। जिस 198 ग्राम पदार्थ को पुलिस ने करोड़ों रुपये की एमडी ड्रग्स बताकर बड़ी कार्रवाई का दावा किया था, वह दोनों सरकारी प्रयोगशालाओं की जांच में साधारण यूरिया निकला। भोपाल और हैदराबाद की फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि जब्त किया गया पदार्थ किसी भी प्रकार का प्रतिबंधित मादक पदार्थ नहीं था। दोनों रिपोर्टों के आधार पर विशेष अदालत ने पूर्व पुलिसकर्मी लखन गुप्ता सहित तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। इस मामले के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
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ड्रग्स तस्करी के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी
करीब 16 महीने पहले इंदौर पुलिस ने विजय पाटीदार और शाहनवाज शेख को गिरफ्तार कर उनके पास से 198 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद होने का दावा किया था। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिसकर्मी लखन गुप्ता का नाम लिया।
इसके बाद पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गिरफ्तारी के बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए लखन गुप्ता को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। उस समय पुलिस ने इस कार्रवाई को ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता बताया था।
दो सरकारी लैब की रिपोर्ट से बदल गई पूरे मामले की तस्वीर
मामले की जांच के दौरान जब्त पदार्थ के नमूने सबसे पहले भोपाल स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब भेजे गए। जांच रिपोर्ट में साफ हो गया कि यह पदार्थ एमडी ड्रग्स नहीं बल्कि यूरिया है। इसके बाद पुलिस ने दोबारा पुष्टि के लिए सैंपल हैदराबाद की केंद्रीय फॉरेंसिक लैब भेजा।
वहां से भी यही रिपोर्ट आई कि जब्त किया गया पदार्थ यूरिया है और उसमें किसी भी प्रकार का नारकोटिक तत्व मौजूद नहीं है। दोनों वैज्ञानिक रिपोर्टों के आधार पर पुलिस ने अदालत में खात्मा पेश किया, जिसके बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
पूर्व पुलिसकर्मी ने लगाया साजिश का आरोप
कोर्ट से बरी होने के बाद पूर्व पुलिसकर्मी लखन गुप्ता ने विशेष अदालत में निजी परिवाद दायर किया है। उन्होंने दो आईपीएस अधिकारियों सहित 19 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लखन गुप्ता का आरोप है कि उनकी छवि खराब करने और उन्हें नौकरी से हटाने के उद्देश्य से पूरी साजिश रची गई।
उनका कहना है कि उन्हें झूठे ड्रग्स मामले में फंसाया गया और बिना पर्याप्त सबूत के गिरफ्तार किया गया। उन्होंने अदालत से दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
आज होगी सुनवाई
लखन गुप्ता का दावा है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने मुखबिर के माध्यम से आरोपियों से उनका नाम कहलवाया। इसके बाद उन्हें आजाद नगर क्षेत्र से उठाकर तेजाजी नगर थाने ले जाया गया, जहां पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बाद में उन्हें विभाग से बर्खास्त भी कर दिया गया।
उनके वकील नितिन पाराशर के अनुसार, परिवाद में विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। विशेष अदालत इस मामले में 27 जून को सुनवाई करेगी। अदालत जांच, एफआईआर दर्ज करने या अन्य कानूनी कार्रवाई को लेकर आदेश दे सकती है।