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CBSE Data Leak : CBSE का डेटा हैकरों के हाथ! 2025-26 तक की पूरी जानकारी खुले आम बिक रही

CBSE Copy Checking Rule

CBSE Data Leak : नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में शामिल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जुड़े लाखों छात्रों के निजी डेटा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी विभिन्न वेबसाइटों पर खुलेआम बिक्री के लिए उपलब्ध है। इस मामले ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि CBSE ने डेटा हैकिंग या डेटा ब्रीच की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं ने डेटा सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि कुछ वेबसाइटें छात्रों का डेटा बेचकर आर्थिक लाभ कमा रही हैं।

नाम, मोबाइल नंबर और स्कूल की जानकारी तक उपलब्ध

रिपोर्टों के अनुसार इन वेबसाइटों पर छात्रों की कई संवेदनशील जानकारियां उपलब्ध बताई जा रही हैं। इनमें छात्रों के नाम, माता-पिता के नाम, मोबाइल नंबर, स्कूल का नाम, विषयों की जानकारी, जिला और अन्य व्यक्तिगत विवरण शामिल हैं।

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि कुछ प्लेटफॉर्म 2025-26 बैच तक के छात्रों का डेटा उपलब्ध होने का दावा कर रहे हैं। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह शिक्षा क्षेत्र में डेटा सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मामला माना जा सकता है।

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हजारों रुपए में बिक रहा लाखों छात्रों का रिकॉर्ड

ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभिन्न राज्यों और शहरों के छात्रों का डेटा अलग-अलग कीमतों पर बेचा जा रहा है। दावा है कि दिल्ली के 12वीं कक्षा के 4.20 लाख से अधिक छात्रों का डेटा लगभग 5 हजार रुपए में उपलब्ध है।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के करीब 3.97 लाख छात्रों का डेटा 4 हजार रुपए में और बिहार के लगभग 1.62 लाख छात्रों का डेटा भी 4 हजार रुपए में बेचा जा रहा है। वहीं बेंगलुरु क्षेत्र के CBSE 2025-26 बैच से संबंधित डेटा 999 रुपए में उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामला गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

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विशेषज्ञों ने जताई डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता

कैरियर-360 संस्था के संस्थापक महेश्वर पेरी ने कहा कि यदि यह डेटा किसी हैकिंग, डेटा लीक या किसी अंदरूनी सेंधमारी के माध्यम से बाहर आया है, तो यह शिक्षा व्यवस्था और देश के डेटा सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।

उनका कहना है कि छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस पूरे मामले पर अब तक CBSE और शिक्षा मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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री-इवैल्युएशन प्रक्रिया के बीच साइबर हमले जारी

इस बीच CBSE की री-इवैल्युएशन प्रक्रिया भी जारी है। बोर्ड के अनुसार अब तक करीब 44 हजार छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन के लिए आवेदन किया है। इनमें 4,924 छात्रों ने उत्तर पुस्तिका की जांच और सत्यापन के लिए आवेदन किया है, जबकि 39,056 छात्रों ने री-इवैल्युएशन का विकल्प चुना है। आवेदन की अंतिम तिथि 6 जून निर्धारित की गई है।

बताया जा रहा है कि 19 मई को प्रक्रिया शुरू होने के बाद से CBSE पोर्टल पर लगातार साइबर हमलों का सामना करना पड़ रहा है। कई छात्रों और अभिभावकों ने यह शिकायत भी की है कि उन्हें अभी तक उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी प्राप्त नहीं हुई है।

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डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा अब सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल शिक्षा के बढ़ते दायरे के साथ डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी के कथित रूप से ऑनलाइन उपलब्ध होने की खबरें इस बात की ओर संकेत करती हैं कि शैक्षणिक संस्थानों को साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। आने वाले समय में इस मामले की जांच और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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