MP Cyber Tehsil : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ा रही है। इसी दिशा में शुरू की गई साइबर तहसील 2.0 पहल राजस्व विभाग में बड़ा बदलाव लेकर आई है। इस नई व्यवस्था के जरिए भूमि नामांतरण की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक आसान, पारदर्शी और तेज हो गई है। सरकार के अनुसार प्रदेश में अब तक 5 लाख 60 हजार से अधिक ऑनलाइन नामांतरण प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जा चुका है।
नामांतरण प्रक्रिया हुई तेज और आसान
पहले जमीन नामांतरण के मामलों के निपटारे में करीब 70 दिन तक का समय लग जाता था। लेकिन साइबर तहसील 2.0 लागू होने के बाद अधिकांश मामलों का समाधान अब 20 से 25 दिनों के भीतर हो रहा है। इससे आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिली है और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है। डिजिटल व्यवस्था के कारण रिकॉर्ड की निगरानी और सत्यापन भी तेजी से हो रहा है।
आंशिक खसरा बिक्री के मामले भी हुए शामिल
राज्य सरकार ने साइबर तहसील 1.0 की सफलता के बाद इसके नए संस्करण साइबर तहसील 2.0 में आंशिक खसरा यानी भूमि के किसी हिस्से की बिक्री से जुड़े मामलों को भी शामिल कर लिया है। इससे सीमांकन, रिकॉर्ड संशोधन और भूमि संबंधी जानकारी को अपडेट करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद हो गई है। अब जमीन से जुड़े कई कार्य ऑनलाइन माध्यम से आसानी से पूरे किए जा सकते हैं।
रियल टाइम सिस्टम से जुड़ी तहसीलें
प्रदेश के 1192 तहसीलदार और नायब तहसीलदार न्यायालय इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। यह पूरी प्रणाली रियल टाइम समन्वय के साथ काम कर रही है। इससे भूमि रिकॉर्ड में बदलाव और नामांतरण संबंधी मामलों का तेजी से निपटारा संभव हो रहा है। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ी हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साझा किया वीडियो
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पहल को लेकर अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया है। उन्होंने कहा कि “बदल रहा है मध्यप्रदेश, डिजिटल हो रहा है मध्यप्रदेश।” मुख्यमंत्री के अनुसार साइबर तहसील 2.0 के माध्यम से सुशासन को नई गति मिली है और नागरिकों को मिलने वाली सेवाएं पहले से अधिक पारदर्शी और प्रभावी हुई हैं।
डिजिटल प्रशासन की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश
साइबर तहसील 2.0 को राज्य सरकार की डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल राजस्व मामलों के निपटारे में तेजी आई है, बल्कि नागरिकों का समय और संसाधन भी बच रहे हैं। आने वाले समय में इस तरह की डिजिटल सेवाओं के विस्तार से प्रशासनिक प्रक्रियाएं और अधिक सरल एवं नागरिक हितैषी बनने की उम्मीद है।