उज्जैन में 170 साल पुराना मंदिर किया जा रहा शिफ्ट, पांच पीढ़ियों से सेवा कर रहा परिवार हुआ भावुक
मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक पुराने रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान ऐसे कागजात मिले हैं, जिनका संबंध वर्ष 1857 से बताया जा रहा है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मंदिर की उम्र करीब 170 से 180 वर्ष होने की बात कही जा रही है। हालांकि दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि अलग प्रक्रिया का विषय है।
MP News: धार्मिक नगरी उज्जैन में विकास और धार्मिक विरासत से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया है। शहर में चल रहे सड़क चौड़ीकरण के काम के कारण करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को मौजूदा स्थान से हटाकर दूसरी जगह स्थापित किया जा रहा है। मंदिर को लेकर स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जाता है कि इसका इतिहास 1857 के आसपास से जुड़ा हुआ है। वहीं मंदिर शिफ्टिंग को लेकर 5 पीढ़ियों से सेवा करने वाला एक परिवार भावुक है। स्थानीय लोगों ने कहा कि यह मंदिर हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
यातायात व्यवस्था करने के लिए मंदिर शिफ्टिंग
मंदिर का स्थानांतरण कंठाल से क्षत्रिय चौक के बीच सड़क चौड़ीकरण परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना की वजह से क्षेत्र के कुछ अन्य धार्मिक स्थलों को भी दूसरी जगह ले जाने की प्रक्रिया चल रही है। प्रशासन का कहना है कि सड़क का विस्तार यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है। साथ ही मंदिर की धार्मिक पहचान और परंपराओं को बनाए रखते हुए पुनर्स्थापना की जा रही है।
5 पीढ़ियों से जुड़ा परिवार करता है मंदिर का रख रखाव
मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक पुराने रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान ऐसे कागजात मिले हैं, जिनका संबंध वर्ष 1857 से बताया जा रहा है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मंदिर की उम्र करीब 170 से 180 वर्ष होने की बात कही जा रही है। हालांकि दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि अलग प्रक्रिया का विषय है।
इस मंदिर की एक और खासियत इसकी सेवा परंपरा है। मंदिर से जुड़े परिवार के मुताबिक करीब पांच पीढ़ियों से उनके परिवार के लोग यहां पूजा और देखरेख की जिम्मेदारी निभाते आ रहे हैं। ऐसे में मंदिर का स्थानांतरण केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की भावनाओं से भी जुड़ा विषय है।
टंकी चौक में बनेगा नया मंदिर
प्रशासन और मंदिर से जुड़े लोगों के बीच बातचीत के बाद मंदिर को टंकी चौक क्षेत्र में पुनर्स्थापित करने पर सहमति बनी है। नई जगह से संबंधित दस्तावेज भी मंदिर पक्ष को उपलब्ध कराए गए हैं। मंदिर शिफ्टिंग के दौरान प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की टीमें मौजूद हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके, और किसी भी तरह का व्यवधान ना उत्पन्न हो।
