MP स्टेट म्यूजियम में सबसे लंबी हस्त लिखित पांडुलिपि, अहिल्या गीता की लंबाई फुटबॉल के आधे मैदान के बराबर
अब यह दुर्लभ दस्तावेज मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन लेखन और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भारतीय इतिहास और साहित्य से जुड़ी एक बेहद दुर्लभ धरोहर सामने आई है। स्टेट म्यूजियम के संग्रह में मौजूद करीब 300 साल पुरानी ‘अहिल्या गीता’ को शोध और रिकॉर्ड की जांच के बाद भारत की सबसे लंबी हस्तलिखित पांडुलिपि के रूप में पहचाना गया है। इस स्क्रॉल की लंबाई करीब 138 फीट, जबकि चौड़ाई महज चार इंच है।
आधे फुटबॉल मैदान के बराबर लंबाई
इस पांडुलिपि की सबसे खास बात सिर्फ इसकी लंबाई नहीं, बल्कि इसकी लेखन शैली भी है। संस्कृत में लिखे गए इसके अक्षर बेहद छोटे हैं और कई जगह उनका आकार महज 3 से 4 प्वाइंट के आसपास बताया गया है। खास बात यह है कि इतनी महीन लिखावट के बावजूद स्क्रॉल में कोई स्पष्ट गलती नहीं मिली है। इसे बिना किसी गाइडलाइन के हाथ से लिखा गया था। इसकी लंबाई 138 फीट है, यानी कि फुटबॉल के आधे मैदान के बराबर है।
अहिल्याबाई होलकर के संग्रह से जुड़ाव
म्यूजियम के रिकॉर्ड के मुताबिक पांडुलिपि को एक्सेशन नंबर 2866 के तहत दर्ज किया गया था। रिकॉर्ड में बताया गया है कि इसे 15 जुलाई 1944 को हुजूर जवाहरखाना से संग्रह में लिया गया था। अधिकारियों और विशेषज्ञों की जांच में इसके संबंध रानी अहिल्याबाई होलकर के निजी संग्रह से बताए गए हैं। मध्य प्रदेश के स्टेट म्यूजियम के आर्काइव से ज्ञान भारतम् अभियान के दौरान ये दोबारा सामने आई है।
भागवत पुराण के 13 अध्याय मौजूद
पांडुलिपि को चावल की भूसी से तैयार कागज पर लिखा गया है। इसमें भागवत पुराण के 13 अध्याय शामिल हैं। इन अध्यायों में राजा परीक्षित और ऋषि शुकदेव के बीच संवाद के जरिए धार्मिक कथा का वर्णन मिलता है। स्क्रॉल में भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप का चित्रण भी मौजूद है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत
यह खोज ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान के दौरान संग्रहालय के पुराने रिकॉर्ड और संरक्षित पांडुलिपियों की समीक्षा के क्रम में सामने आई। अब यह दुर्लभ दस्तावेज मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन लेखन और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
