Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द करने का दिया आदेश, CJP ने वापस लिया 5 सितंबर का मार्च
Supreme Court: जंतर-मंतर मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में कोर्ट ने बंगाल, बिहार, दिल्ली, असम और महाराष्ट्र में छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया है।
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ी सभी FIR को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 में दी गई शक्तियों का इस्तेमाल किया। हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटाबेस के मुताबिक, दिल्ली में क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा।
13 FIR रद्द करने की मांग पर हुई सुनवाई
NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज 13 FIR रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की। यह मांग भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने की थी।
पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे 2873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए नई FIR दर्ज करने की परमिशन भी मांगी है।
आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर एक्शन
हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से कुछ के खिलाफ FIR पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है। जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर बढ़ाने की अनुमति दी गई है उनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस ने कहा कि आम तौर पर नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
पुलिस ने कोर्ट से यह भी कहा कि उसका फैसला सिर्फ इस मामले की परिस्थितियों तक सीमित रहे और भविष्य के मामलों में इसे मिसाल न माना जाए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या कहा ?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि केंद्र ( दिल्ली पुलिस ) के अलावा बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किए हैं। सरकारों ने यह भी आश्वासन दिया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
CJP ने वापस लिया मार्च
सुनवाई से पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने का फैसला किया है। प्रवक्ता सौरव ने बताया कि केंद्र ने उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया है। दास ने मामले में दोनों पक्षों के वकीलों और अदालत के प्रयासों के लिए भी धन्यवाद दिया।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा
CJI ने कहा, जहां तक NEET परीक्षा, 2026 के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के मुआवजे का सवाल है, हमें बताया गया है कि इसके बारे में नीति 3 महीने में बना ली जाएगी. इस नीति को 3 महीने में पूरा कर मुआवजा दिया जाए.
खुले मन से बातचीत से हर समस्या का हल संभव: CJI
CJP के फैसले का स्वागत करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सद्भावना के साथ काम करें तो सभी मुद्दों को एक-एक कर सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसे खुले मन से चर्चा के जरिए हल न किया जा सके। सॉलिसिटर जनरल ने भी कहा कि दोनों पक्षों ने रचनात्मक तरीके से काम किया और एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी की तरह नहीं देखा।
20 जुलाई को हुई थी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों में झड़प
20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में दिल्ली में हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।
इसके बाद छात्रों का आंदोलन कई शहरों तक फैल गया। उनकी मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था।
आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से CJP की दूसरी मांगें मानने के बाद 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कर दिया गया था।
