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Project Cheetah: कूनो को मिलेगी नई सौगात! दक्षिण अफ्रीका से आएंगे 6-8 और चीते, जानिए पूरी खबर

Project Cheetah: प्रोजेक्ट चीता की सफलता के बाद दक्षिण अफ्रीका ने भारत को छह से आठ और चीते देने पर सहमति जताई है। नई खेप को सबसे पहले मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा। वहीं नौरादेही और गुजरात के बन्नी अभयारण्य को भी चीतों के नए ठिकाने के रूप में तैयार किया जा रहा है।

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दक्षिण अफ्रीका से आएंगे नए चीते

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई चर्चा के बाद भारत को छह से आठ और चीते देने पर सहमति बनी है। इसके बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नए चीतों के स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बाहर से आने वाले चीतों के लिए भविष्य में भी कूनो ही मुख्य लॉन्चिंग ग्राउंड रहेगा।

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कूनो और गांधी सागर में हैं 53 चीते

फिलहाल मध्य प्रदेश के कूनो और गांधी सागर अभयारण्यों में कुल 53 चीते मौजूद हैं। इनमें विदेश से लाए गए चीते और भारत में जन्मे चीते दोनों शामिल हैं। भारत में जन्मे कई चीते अब वयस्क भी हो चुके हैं, जिसे प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

नौरादेही बनेगा तीसरा ठिकाना

मध्य प्रदेश के नौरादेही अभयारण्य को चीतों का तीसरा घर बनाने की तैयारी अंतिम चरण में है। संभावना है कि इस साल के अंत तक कूनो से कुछ चीतों को वहां स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद गुजरात के बन्नी अभयारण्य में भी चीतों की नई खेप बसाने की योजना है।

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2022 से लगातार बढ़ रही चीतों की संख्या

भारत में प्रोजेक्ट चीता के तहत 2022 में नामीबिया से 8, 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और 2026 में बोत्सवाना से 9 चीते लाए गए थे। अब दक्षिण अफ्रीका से एक और खेप आने की तैयारी है, जिससे देश में चीतों की संख्या और बढ़ेगी।

राजस्थान ने भी जताई इच्छा

राजस्थान सरकार ने भी अपने राज्य में चीते बसाने की इच्छा जताई है। सरिस्का में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सामने यह प्रस्ताव रखा। प्रोजेक्ट चीता के तहत राजस्थान के मुकुंदरा, शाहगढ़ और भैंसरोड़गढ़ अभयारण्यों को भी चीतों के लिए उपयुक्त माना गया है।

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चीता कॉरिडोर बनाने की तैयारी

कूनो से कई चीते लगातार राजस्थान की सीमा में पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच एक चीता कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। इससे चीतों की आवाजाही और संरक्षण दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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