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MP UCC पर बड़ा मंथन : आदिवासी विवाह पंजीयन हो सकता है अनिवार्य, कमेटी के सामने आए 4 अहम सुझाव

MP UCC

MP UCC : भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार कर रही समिति के सामने आदिवासी समाज को लेकर चार बड़े सुझाव रखे गए हैं। इनमें सबसे अहम प्रस्ताव आदिवासी समुदाय में विवाह पंजीयन को अनिवार्य बनाने का है। अब इन सुझावों पर विचार के बाद समिति अंतिम फैसला लेगी।

आदिवासियों को लेकर सामने आए चार विकल्प

यूसीसी पर काम कर रही समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह के अनुसार जनजातीय समाज को लेकर अलग-अलग सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।

पहला सुझाव: UCC से पूरी छूट

एक राय यह सामने आई है कि अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखा जाए। इसके पीछे तर्क यह है कि आदिवासी समाज की अपनी परंपराएं और रीति-रिवाज हैं, जिनमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

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दूसरा सुझाव: सभी नियम समान रूप से लागू हों

कुछ लोगों का मानना है कि आदिवासी समाज को भी यूसीसी के तहत शामिल किया जाना चाहिए, ताकि सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था लागू हो सके।

तीसरा सुझाव: सिर्फ शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो

सबसे ज्यादा चर्चा इस सुझाव की हो रही है कि आदिवासी समाज पर पूरा यूसीसी लागू करने के बजाय केवल विवाह पंजीयन को अनिवार्य बनाया जाए। इससे विवाह का आधिकारिक रिकॉर्ड रहेगा, जबकि पारंपरिक रीति-रिवाज भी बने रहेंगे।

चौथा सुझाव: स्वैच्छिक व्यवस्था बने

एक अन्य सुझाव यह है कि यूसीसी को आदिवासी समाज के लिए वैकल्पिक रखा जाए। यानी जो परिवार इसकी व्यवस्था अपनाना चाहें, वे अपनी इच्छा से इसमें शामिल हो सकें।

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अब कमेटी तय करेगी आगे का रास्ता

समिति का कहना है कि समाज के विभिन्न वर्गों से मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मध्य प्रदेश में यूसीसी का स्वरूप कैसा होगा।

UCC को लेकर उठे सवाल

इस बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद (मप्र) के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारुन ने यूसीसी को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सरकार कुछ चुनिंदा विषयों पर ही जोर दे रही है, जबकि संविधान में कई अन्य निर्देशात्मक सिद्धांत भी हैं, जिन पर समान रूप से काम होना चाहिए।

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क्या है सबसे बड़ा मुद्दा?

फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या आदिवासी समाज के लिए केवल विवाह पंजीयन अनिवार्य किया जाएगा या उन्हें पूरी तरह यूसीसी के दायरे में लाया जाएगा। इसका जवाब अब समिति की अंतिम सिफारिशों के बाद ही सामने आएगा।

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