MP UCC Meeting : भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। राजधानी भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में राज्य स्तरीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न आयोगों, सरकारी विभागों, राजनीतिक दलों और समाज के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए। माना जा रहा है कि इन सुझावों के आधार पर समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंप सकती है।
पूर्व न्यायाधीश की अनुपस्थिति में चली बैठक
समान नागरिक संहिता समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई दिल्ली में एक अन्य आवश्यक बैठक में व्यस्त होने के कारण व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकीं।
उनकी अनुपस्थिति में समिति के अन्य सदस्यों ने सदस्य सचिव अजय कटेसरिया के साथ अलग-अलग सत्रों में चर्चा की। बैठक के दौरान विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से विस्तार से सुझाव लिए गए और उनके विचार दर्ज किए गए।
आयोगों और विभागों ने रखे अपने सुझाव
बैठक के पहले चरण में महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग, बाल संरक्षण आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी। इसके बाद राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से अपने सुझाव समिति के सामने रखे। समिति का उद्देश्य सभी वर्गों की चिंताओं और अपेक्षाओं को समझते हुए संतुलित मसौदा तैयार करना बताया गया।
राजनीतिक दलों की बैठक में सीमित भागीदारी
समान नागरिक संहिता पर चर्चा के लिए छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था। हालांकि बैठक में केवल भारतीय जनता पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के प्रतिनिधि ही पहुंचे। कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। समिति ने मौजूद दलों के सुझावों और आपत्तियों को विस्तार से सुना।
सीपीएम ने जताया कड़ा विरोध
बैठक के दौरान सीपीएम प्रतिनिधि पीवी रामचंद्रन ने मध्य प्रदेश में UCC लागू करने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बेरोजगारी, महंगाई और अन्य सामाजिक चुनौतियां अधिक महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। उनका कहना था कि इस कानून का असर आदिवासी और अन्य वर्गों पर पड़ सकता है, इसलिए इसे लागू करने से पहले व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।
भाजपा ने समिति को दिए 10 अहम सुझाव
बैठक में भाजपा नेताओं ने समान नागरिक संहिता के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव लिखित रूप में सौंपे। इनमें विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने, बाल विवाह पर सख्त कार्रवाई, बेटा-बेटी को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार देने और सभी नागरिकों के लिए वसीयत के समान नियम लागू करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा तलाक, गोद लेने, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और दिव्यांग बच्चों के अधिकारों से जुड़े सुझाव भी दिए गए।
महिलाओं और परिवारों के हितों पर विशेष जोर
भाजपा द्वारा दिए गए प्रस्तावों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। सुझावों में यह भी कहा गया कि विवाह, तलाक और गोद लेने की प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया जाए तथा मामलों का निपटारा छह माह के भीतर सुनिश्चित किया जाए। इससे न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की बात कही गई।
विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया स्वागत योग्य कदम
रामेश्वर शर्मा ने समान नागरिक संहिता को संविधान की भावना के अनुरूप बताते हुए इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूत करेगा। साथ ही कुछ अपराधों में सजा और जमानत संबंधी प्रावधानों को और सख्त बनाने का सुझाव भी दिया।
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अंतिम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
बैठक में मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं के बाद अब समिति की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। UCC को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस लगातार जारी है।