Greenfield Corridor : मध्य प्रदेश। इंदौर के सांवेर विधानसभा क्षेत्र स्थित चंद्रावतीगंज में शनिवार को इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना का विधिवत भूमिपूजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल यह कॉरिडोर मालवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
48 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग का होगा निर्माण
ग्रीन फील्ड कॉरिडोर लगभग 48 किलोमीटर लंबा फोरलेन मार्ग होगा, जिसका निर्माण करीब 2935 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। यह सड़क इंदौर के पितृ पर्वत क्षेत्र से शुरू होकर उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर के समीप सिंहस्थ बायपास तक पहुंचेगी।
परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा समय में कमी आएगी और आवागमन पहले की तुलना में अधिक तेज एवं सुविधाजनक होगा। विशेष रूप से सिंहस्थ महापर्व के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर यातायात सुविधा मिलने की उम्मीद है।
किसानों को मिला बाजार दर के आधार पर मुआवजा
इस परियोजना के लिए कुल 917 किसानों की 242.939 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। सरकार की ओर से प्रभावित किसानों को 816 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा प्रदान किया गया है।
परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि किसानों को कलेक्टर गाइडलाइन के बजाय बाजार और बिक्री दरों के आधार पर मुआवजा दिया गया। जानकारी के अनुसार किसानों को सामान्य दरों की तुलना में 4 से 8 गुना अधिक राशि प्रदान की गई है। प्रदेश में इस तरह की व्यवस्था को एक नई पहल माना जा रहा है।
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दर्जनों गांवों और लाखों लोगों को होगा फायदा
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का सीधा लाभ दोनों जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलेगा। इस परियोजना से इंदौर जिले के 20 और उज्जैन जिले के 8 गांव सीधे जुड़ेंगे। इसके अलावा आसपास के 40 से 50 गांवों के करीब 15 लाख लोगों को बेहतर सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
सिंहस्थ और पर्यटन को मिलेगी नई गति
कॉरिडोर बनने के बाद बाहरी राज्यों और अन्य शहरों से आने वाले श्रद्धालु इंदौर एयरपोर्ट से सीधे उज्जैन पहुंच सकेंगे। इससे सिंहस्थ मेले के दौरान शहरों के भीतर ट्रैफिक दबाव कम होगा और यात्रियों का समय भी बचेगा।
इसके अलावा उज्जैन के धार्मिक पर्यटन, व्यापारिक गतिविधियों और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में मालवा क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।