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Bengal Politics : ममता के 21 सांसद छोड़ेगें TMC! सुखेंदु शेखर रे ने दिया इस्तीफ़ा, CM शुभेंदु के साथ BJP बंगाल प्रभारी से मुलाकात

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Bengal Politics : कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कदम के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग करते हुए पत्र लिखा है। वहीं कई सांसदों की एक अहम बैठक ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

सांसद पद और पार्टी दोनों से दिया इस्तीफा

सुखेंदु शेखर रे ने सोमवार को राज्यसभा सांसद पद के साथ-साथ पार्टी से भी दूरी बना ली। अपने इस्तीफे में उन्होंने राज्य की मौजूदा स्थिति और पार्टी के कामकाज को लेकर कई सवाल उठाए। उनका कार्यकाल अभी 2029 तक था, लेकिन इस्तीफे के बाद उनकी सीट खाली हो गई है।

Bengal Politics : ममता के 21 सांसद छोड़ेगें TMC! सुखेंदु शेखर रे ने दिया इस्तीफ़ा, CM शुभेंदु के साथ BJP बंगाल प्रभारी से मुलाकात

किन सांसदों ने किया बागी गुट का समर्थन?

लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में 20 सांसदों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। इनमें अरूप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी रॉय, जगदीश बसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, कालीपदा सोरेन, शर्मिला सरकार, जून मालिया, बापी हल्दार, असित मल और सुखेंदु शेखर रॉय समेत कई सांसदों के नाम सामने आए हैं। बागी गुट ने काकोली घोष दस्तीदार को अपना नेता मान्यता देने की भी मांग की है।

दिल्ली में हुई बैठक से बढ़ी चर्चा

इस्तीफे के कुछ घंटों बाद दिल्ली में कई सांसदों की बैठक हुई। इस बैठक में सुखेंदु शेखर रे भी मौजूद रहे। बैठक में शामिल नेताओं के नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गईं। हालांकि इसमें शामिल सांसदों की पूरी संख्या और उनका सदनवार ब्योरा स्पष्ट नहीं हो सका।

पार्टी में बढ़ रही थी नाराजगी’

इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर रे ने कहा कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष का माहौल था। उनका आरोप था कि कई नेताओं को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर नहीं मिल रहा था और महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी राय भी नहीं ली जाती थी।

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इस्तीफे में उठाए कई बड़े सवाल

अपने त्यागपत्र में उन्होंने शासन व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का जिक्र किया। साथ ही चुनावी नतीजों को भी पार्टी के लिए एक बड़ा संदेश बताया। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव परिणामों के बाद आत्ममंथन की जरूरत थी।

बागी खेमे ने भी किया समर्थन

सुखेंदु शेखर रे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके कई मुद्दे सही हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर जो बातें लंबे समय से उठ रही थीं, अब वे खुलकर सामने आने लगी हैं।

पहले भी सामने आ चुकी है नाराजगी

सुखेंदु शेखर रे से पहले सांसद काकोली घोष भी पार्टी के पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं। उनके इस्तीफे के बाद भी संगठन के भीतर असंतोष को लेकर चर्चाएं हुई थीं। अब लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रमों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

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विधायकों के अलग रुख ने बढ़ाई चिंता

इससे पहले बड़ी संख्या में विधायकों के अलग रुख अपनाने की खबरों ने भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ाई थीं। बागी विधायकों ने अपना अलग नेतृत्व चुनते हुए विधानसभा में समर्थन पत्र भी सौंपा था। इस घटनाक्रम के बाद अब सांसदों के स्तर पर बढ़ती हलचल ने बंगाल की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।

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