Singer Suman Kalyanpur Passes Away : मुंबई। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और बेहद लोकप्रिय पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम मुंबई में निधन हो गया। वह 89 वर्ष की थीं। परिवार और करीबी सूत्रों के अनुसार, उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
अपनी मधुर आवाज और सादगी भरे व्यक्तित्व के लिए पहचानी जाने वाली सुमन कल्याणपुर ने भारतीय संगीत को कई यादगार गीत दिए। बताया जा रहा है कि अपने जीवन के अंतिम दिनों में वह अपने ही गाए हुए पुराने गीत सुन रही थीं और बेहद शांतिपूर्ण तरीके से इस दुनिया को अलविदा कह गईं।
सोमवार को होगा अंतिम संस्कार
सुमन कल्याणपुर की करीबी मित्र मंगला खाडिलकर ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने रविवार रात करीब 8 बजे अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट में किया जाएगा।
परिवार में उनकी बेटी चारू हैं। संगीत और कला क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके लंबे और शानदार संगीत सफर की पहचान माना जाता है।
1954 में मिला था पहला बड़ा मौका
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को ढाका में हुआ था। उनका बचपन का नाम सुमन हेमाडी था। शुरुआती दिनों में उनकी रुचि पेंटिंग और संगीत दोनों में थी। उन्होंने मुंबई में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की और बाद में संगीत को ही अपना करियर बनाया।
वर्ष 1954 में फिल्म ‘मंगू’ से उन्हें फिल्मी दुनिया में पहला बड़ा अवसर मिला। इसी दौर में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे संगीत प्रेमियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
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60 और 70 के दशक में बनीं संगीत की बड़ी आवाज
सुमन कल्याणपुर ने 1960 और 1970 के दशक में अपनी सुरीली आवाज से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई। उस समय हिंदी फिल्म संगीत में कई बड़े नाम मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपनी अलग शैली और गायकी से पहचान बनाई।
उनके गाए गीत ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ आज भी लोगों की पसंद बने हुए हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, कन्नड़, असमी और ओड़िया जैसी कई भाषाओं में भी गीत गाए।
लता मंगेशकर से होती थी तुलना
सुमन कल्याणपुर की आवाज को अक्सर महान गायिका लता मंगेशकर की आवाज से मिलती-जुलती माना जाता था। कई बार श्रोताओं के लिए दोनों की आवाज में अंतर करना भी मुश्किल हो जाता था। हालांकि सुमन ने हमेशा इस तुलना को सहजता से लिया और कभी इसे प्रतिस्पर्धा नहीं माना।
उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि लता मंगेशकर उनके लिए सिर्फ एक महान कलाकार ही नहीं बल्कि एक करीबी मित्र भी थीं। दोनों के बीच आपसी सम्मान और स्नेह का रिश्ता था।
मोहम्मद रफी के साथ दिए कई सुपरहिट गीत
1960 के दशक में जब मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के बीच रॉयल्टी को लेकर मतभेद सामने आए, तब कई संगीतकारों ने सुमन कल्याणपुर को मौका देना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने रफी साहब के साथ कई सुपरहिट युगल गीत गाए।
उनकी आवाज की मिठास और सुरों पर मजबूत पकड़ ने उन्हें उस दौर की सबसे सफल गायिकाओं में शामिल कर दिया। आज भी उनके और रफी साहब के गाए गीत रेडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खूब सुने जाते हैं।
बेहद निजी स्वभाव की थीं सुमन कल्याणपुर
सुमन कल्याणपुर अपने निजी जीवन को हमेशा मीडिया की नजरों से दूर रखना पसंद करती थीं। यही वजह थी कि प्रसिद्ध रेडियो उद्घोषक अमीन सयानी को उनका इंटरव्यू लेने के लिए लगभग 45 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा।
आखिरकार वर्ष 2005 में उन्होंने इंटरव्यू देने के लिए सहमति दी, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। उन्होंने स्पष्ट किया था कि इंटरव्यू के दौरान उनकी तस्वीर नहीं ली जाएगी और वह केवल उन्हीं सवालों का जवाब देंगी जिनमें वह सहज महसूस करेंगी।
पड़ोसी ने पहचानी थी उनकी प्रतिभा
सुमन कल्याणपुर की संगीत यात्रा की शुरुआत भी काफी दिलचस्प रही। उनके पड़ोसी और परिवार के करीबी पंडित केशवराव भोले ने सबसे पहले उनकी गायन प्रतिभा को पहचाना था। उनकी सलाह पर सुमन के पिता ने उन्हें संगीत की शिक्षा दिलानी शुरू की।
शुरुआत में यह केवल एक शौक था, लेकिन बाद में यही शौक उनका जीवन बन गया। उन्होंने उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और मास्टर नवरंग जैसे प्रतिष्ठित गुरुओं से संगीत की गहन शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर भारतीय संगीत जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
सुमन कल्याणपुर के टॉप 10 गाने
1. आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे
(ब्रह्मचारी) मोहम्मद रफी के साथ
2. ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे
(जब जब फूल खिले) मोहम्मद रफी के साथ
3. तुमने पुकारा और हम चले आए
(राजकुमार) मोहम्मद रफी के साथ
4. तुमसे ओ हसीना कभी मोहब्बत ना होती
(फर्ज) मोहम्मद रफी के साथ
5. मेरा प्यार भी तू है, ये बहार भी तू है
(साथी) मुकेश के साथ
6. बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है
सोलो
7. बाद मुद्दत के यह घड़ी आई
(जहाँ आरा, 1964) मोहम्मद रफी के साथ
8.बुझा दिए हैं खुद अपने हाथों
(रागिनी) सोलो
9. ना तुम हमें जानो
(बात एक रात की) हेमंत कुमार के साथ
10. परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
(रागिनी) मोहम्मद रफी के साथ