HIGHLIGHTS:
- देवास हादसे की न्यायिक जांच के आदेश
- रिटायर्ड जस्टिस सुभाष काकड़े आयोग प्रमुख बने
- हादसे में लापरवाही और जिम्मेदारी तय होगी
- सुरक्षा नियमों और लाइसेंस शर्तों की जांच होगी
- आयोग एक महीने में सरकार को रिपोर्ट देगा
Dewas blast update: भोपाल। मध्यप्रदेश शासन ने देवास जिले के टोंकखुर्द क्षेत्र में स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण हादसे की न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुभाष काकड़े की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया है। सरकार ने आयोग को हादसे के हर पहलू की गहराई से जांच करने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।
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हादसे के कारणों और लापरवाही की होगी पड़ताल
जांच आयोग यह पता लगाएगा कि फैक्ट्री में विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था। आयोग फैक्ट्री में विस्फोटक सामग्री के निर्माण, भंडारण और उपयोग से जुड़े नियमों की जांच करेगा। साथ ही लाइसेंस शर्तों, फैक्ट्री अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम और श्रम सुरक्षा कानूनों के पालन की स्थिति का भी परीक्षण किया जाएगा। बताया जा रहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
राहत और बचाव कार्यों की भी होगी समीक्षा
सरकार ने आयोग को हादसे के दौरान और उसके बाद किए गए अग्निशमन, राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावशीलता की जांच की जिम्मेदारी भी सौंपी है। आयोग यह देखेगा कि मेडिकल सहायता, आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक प्रतिक्रिया कितनी तेज और प्रभावी रही। साथ ही यह भी जांच होगी कि हादसे के समय सुरक्षा संसाधन पर्याप्त थे या नहीं। इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
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एक महीने में देनी होगी रिपोर्ट
राज्य शासन ने आयोग को राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से एक महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा उपायों, निरीक्षण प्रणाली और नियामक व्यवस्था में सुधार के सुझाव भी देगा। इस हादसे के बाद प्रदेश में पटाखा फैक्ट्रियों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की नजर आयोग की रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।