Dhar Bhojshala Hearing : इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में लंबे समय से चर्चित भोजशाला प्रकरण की सुनवाई मंगलवार को पूरी हो गई। करीब दो घंटे से अधिक चली सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने अपने-अपने तर्क कोर्ट के सामने रखे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने भी अपनी सर्वे रिपोर्ट और पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट (MP High Court) ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी पक्षों की नजर कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हुई है।
मुस्लिम पक्ष ने रखा अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी दलीलें पेश कीं। वहीं एडवोकेट तौसिफ वारसी कोर्ट में मौजूद रहे।
मुस्लिम पक्ष ने मुख्य रूप से राज्य सरकार और ASI द्वारा प्रस्तुत सर्वे रिपोर्ट और तर्कों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सर्वे प्रक्रिया में कई कमियां रही हैं और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
साल 2022 में दायर की गई थी याचिका
भोजशाला मामले में साल 2022 में रंजना अग्निहोत्री और उनके साथियों ने याचिका दायर की थी। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को वहां पूर्ण धार्मिक अधिकार देने की मांग की गई थी। इसके बाद यह मामला लगातार अदालत में सुनवाई के दायरे में बना हुआ है। इस प्रकरण ने प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चा बटोरी है।
ASI ने 98 दिनों तक किया था वैज्ञानिक सर्वे
वर्ष 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने भोजशाला परिसर में करीब 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। सर्वे के दौरान कई पुरातात्विक तथ्यों और संरचनाओं की जांच की गई। बाद में 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी। इस फैसले के बाद मामला और अधिक संवेदनशील बन गया।
धार्मिक स्वरूप को लेकर कोर्ट में बहस
हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा भोजशाला के धार्मिक स्वरूप का रहा। हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन और विनय जोशी ने इसे मंदिर बताते हुए तर्क दिए।
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वहीं शोभा मेनन ने कहा कि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि भोजशाला मंदिर है, मस्जिद है या जैन शाला। उन्होंने कोर्ट में कहा कि यदि यह मंदिर होता तो वहां मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के प्रमाण मौजूद होते, जबकि ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।
धार्मिक स्वरूप तय करने के अधिकार पर सवाल
मुस्लिम पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि किसी विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट के पास होता है। उनका कहना था कि हाईकोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका के माध्यम से इस मुद्दे का फैसला करना उचित नहीं है। साथ ही याचिकाकर्ताओं पर जनहित याचिका का दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया गया।
सलमान खुर्शीद ने ASI रिपोर्ट पर उठाए सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने ASI सर्वे रिपोर्ट की प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान उपलब्ध कराई गई वीडियोग्राफी और तस्वीरें स्पष्ट नहीं थीं। रंगीन फोटो भी उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने अयोध्या मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां रामलला विराजमान की मूर्ति मौजूद थी, जबकि भोजशाला में ऐसी कोई मूर्ति स्थापित नहीं है।
गौतम बुद्ध की प्रतिमा के दावे पर विवाद
मुस्लिम पक्ष की ओर से दावा किया गया कि सर्वे के दौरान गौतम बुद्ध की प्रतिमा मिली थी, लेकिन उसका उल्लेख ASI रिपोर्ट में नहीं किया गया। साथ ही सर्वे में कार्बन डेटिंग तकनीक का उपयोग नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। उनका कहना था कि वैज्ञानिक जांच पूरी तरह आधुनिक और पारदर्शी तरीके से नहीं की गई।
सर्वे प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
एडवोकेट तौसिफ वारसी ने कोर्ट में कहा कि सर्वे के दौरान पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर की मौजूदगी के लिए कोई स्पष्ट न्यायालयीन आदेश नहीं था। इसके बावजूद दोनों अधिकारी पूरे समय मौजूद रहे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सर्वे आधुनिक तकनीक से किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन टीम ने पुरानी “टोटल स्टेशन” तकनीक का उपयोग किया।
अब कोर्ट के फैसले का इंतजार
मामले में सभी पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है और हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट भोजशाला के धार्मिक स्वरूप और ASI सर्वे रिपोर्ट को लेकर क्या निर्णय देता है। इस फैसले पर प्रदेश सहित पूरे देश की नजर बनी हुई है।