Iran- US War Update : वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक इसकी कीमत करीब 126.31 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची, जो मार्च 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। फिलहाल कीमत करीब 125 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
अमेरिका-ईरान तनाव बना मुख्य वजह
रिपोर्ट्स के अनुसार डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर ब्रीफिंग दी जानी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने “छोटे लेकिन ताकतवर हमलों” की योजना तैयार की है, जिसका मकसद ईरान पर दबाव बनाकर उसे बातचीत की टेबल पर लाना है। इस खबर के सामने आते ही तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। वहीं ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तंज कसते हुए कहा कि तेल की कीमतें 140 डॉलर तक जा सकती हैं।
बड़े अपडेट
पिछले 24 घंटों में कई अहम घटनाक्रम सामने आए हैं। अमेरिका ने पिछले दो महीनों में युद्ध पर 25 अरब डॉलर खर्च किए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने राइफल के साथ फोटो साझा कर सख्त रुख दिखाया है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कर अमेरिका पर जहाज और तेल कब्जाने का आरोप लगाया है। वहीं लेबनान में 12 लाख से अधिक लोगों पर भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा भारत और ईरान के बीच विदेश मंत्रियों स्तर पर बातचीत भी हुई है।
भारत-ईरान के बीच अहम चर्चा
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान क्षेत्रीय हालात, समुद्री सुरक्षा और युद्धविराम जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका की कार्रवाइयों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों, खासकर फारस की खाड़ी और होर्मुज क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ी है।
अमेरिका की आर्थिक और सैन्य कार्रवाई
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए आर्थिक कदम भी उठाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, करीब 45 करोड़ डॉलर की ईरानी क्रिप्टोकरेंसी जब्त की गई है। साथ ही, दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford 300 दिनों की लंबी तैनाती के बाद अब अमेरिका लौट रहा है। यह जहाज ईरान से जुड़े अभियानों में सक्रिय रहा है।
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बातचीत में फंसे बड़े मुद्दे
अमेरिका और ईरान के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। इनमें परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम भंडार, होर्मुज जलडमरूमध्य, आर्थिक प्रतिबंध, युद्ध का मुआवजा और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं।
ट्रम्प के सामने कानूनी चुनौती
अमेरिका में युद्ध शक्तियाँ संकल्प (War Powers Resolution) 1973 के तहत राष्ट्रपति को बिना संसद की मंजूरी के 60 दिनों के भीतर सैन्य कार्रवाई के लिए अनुमति लेनी होती है। डोनाल्ड ट्रम्प को 1 मई तक यह मंजूरी लेनी होगी। हालांकि, अमेरिकी संसद में इस मुद्दे पर मतभेद हैं और कुछ सांसद इस युद्ध के खिलाफ हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आगे अमेरिका की रणनीति क्या होती है।
वैश्विक असर की आशंका
तेल की कीमतों में यह उछाल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकेत है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो ऊर्जा संकट और महंगाई दोनों में तेजी आ सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हुई है।