Raghav Chadha New Video : नई दिल्ली। “AAP में बहुत टॉक्सिक माहौल हो गया था… मेरे पास तीन ऑप्शन थे और मैंने तीसरा रास्ता चुना।” इस सीधे और तीखे बयान के साथ राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने आम आदमी पार्टी छोड़ने और बीजेपी जॉइन करने के पीछे की वजह साफ कर दी। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे बन गए थे कि या तो समझौता करना पड़ता या फिर बड़ा फैसला लेना पड़ता।
Raghav Chadha : राघव चड्ढा से बीजेपी को क्या मिला बड़ा फायदा? AAP के लिए क्यों है घातक झटका
राघव के नए वीडियो में क्या ?
जारी किये गए वीडियो में राघव चड्ढा ने कहा कि पिछले तीन दिनों से उन्हें लगातार संदेश मिल रहे थे, जिनमें कुछ लोगों ने बधाई दी तो कई लोगों ने उनके इस फैसले का कारण जानना चाहा। राघव चड्ढा ने कहा कि यह वीडियो उन लोगों के लिए है जो उनके पार्टी छोड़ने के फैसले को समझना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि राजनीति में आने से पहले वह एक चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और उनका करियर काफी अच्छा था, लेकिन उन्होंने सब कुछ छोड़कर राजनीति में कदम रखा। वह AAP के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और पिछले 15 साल से पार्टी के लिए काम कर रहे थे।
आम आदमी पार्टी पहले जैसी नहीं रही
उन्होंने आरोप लगाया कि अब आम आदमी पार्टी पहले जैसी नहीं रही। राघव ने कहा कि पार्टी में अब काम करने और अपनी बात रखने की आजादी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में बोलने तक से रोका जाता था और काम करने में भी बाधाएं डाली जाती थीं। उनके अनुसार, पार्टी अब कुछ “भ्रष्ट और समझौता कर चुके लोगों” तक सीमित हो गई है, जिनका मकसद देश सेवा नहीं बल्कि निजी स्वार्थ है।
ये तीन ऑप्शन थे राघव के पास
राघव चड्ढा ने कहा कि वह पिछले कुछ समय से महसूस कर रहे थे कि वह गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास तीन विकल्प थे- राजनीति छोड़ देना, पार्टी में रहकर बदलाव की कोशिश करना या फिर किसी दूसरी पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करना। अंततः उन्होंने तीसरा विकल्प चुना।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके साथ केवल एक-दो नहीं, बल्कि कुल सात सांसदों ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया। राघव ने कहा कि एक व्यक्ति गलत हो सकता है, दो भी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। इसलिए सभी ने मिलकर नई राजनीतिक दिशा चुनने का निर्णय लिया।
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वर्क कल्चर पर भी उठाए सवाल
वीडियो में राघव चड्ढा ने पार्टी के वर्क कल्चर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब किसी संगठन का माहौल “टॉक्सिक” हो जाता है, तो वहां काम करना मुश्किल हो जाता है और ऐसे में सही निर्णय लेना जरूरी होता है। अंत में उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि पार्टी बदलने के बावजूद वह पहले की तरह ही जनता के मुद्दे संसद में उठाते रहेंगे।