Pahalgam Terror Attack Anniversary : पहलगाम। बैसरन घाटी, जिसे “मिनी स्विट्जरलैंड” कहा जाता है, आज भी उस दर्दनाक दिन की याद दिलाती है। 22 अप्रैल 2025 को दोपहर करीब 2 बजे, पहलगाम की इस खूबसूरत घाटी में टूरिस्ट घूम रहे थे, तभी जंगल की तरफ से आए तीन आतंकियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। करीब 13 मिनट में 26 लोगों की जान चली गई। इस हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया और घाटी वीरान हो गई।
हमले के बाद भी पूरी तरह नहीं लौटी रौनक
एक साल बीत चुका है, लेकिन बैसरन घाटी की रौनक अब तक वापस नहीं आई है। पहले जहां हर दिन 10 हजार से ज्यादा टूरिस्ट आते थे, अब उनकी संख्या घटकर 2000-2500 रह गई है। घाटी अब भी बंद है और टूरिस्ट वहां नहीं जा सकते। मुंबई से आई टूरिस्ट मुनीजा भी घाटी जाना चाहती थीं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें अनुमति नहीं मिली।
टूरिस्ट स्पॉट अब भी बंद, सुरक्षा जांच जारी
हमले के बाद कश्मीर के 48 टूरिस्ट स्पॉट बंद किए गए थे। इनमें से 42 दोबारा खोल दिए गए हैं, लेकिन बैसरन घाटी समेत 6 स्पॉट अब भी बंद हैं। इन जगहों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार समीक्षा कर रही हैं और क्लियरेंस मिलने के बाद ही इन्हें खोला जाएगा।
QR कोड से बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था
अब पहलगाम में सुरक्षा के लिहाज से बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टूरिस्ट के संपर्क में आने वाले स्थानीय लोगों जैसे घोड़े वाले, गाइड और दुकानदारों को QR कोड वाले पहचान पत्र दिए जा रहे हैं। इस कोड को स्कैन करने पर उनकी पूरी जानकारी सामने आ जाती है। इससे टूरिस्ट का भरोसा बढ़ा है और पहचान सुनिश्चित हो रही है।
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हमले के आरोपियों पर कार्रवाई
हमले में शामिल आतंकियों के मददगारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। जम्मू की NIA कोर्ट में 1300 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई है। इसमें लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट समेत 7 आरोपियों को शामिल किया गया है। जांच में पाकिस्तान में साजिश रचे जाने के सबूत भी पेश किए गए हैं।
बहादुरी की मिसाल बना आदिल
हमले के दौरान स्थानीय युवक सैयद आदिल हुसैन ने टूरिस्ट को बचाने की कोशिश में अपनी जान दे दी। उन्होंने एक आतंकी से भिड़कर उसकी राइफल पकड़ ली, लेकिन आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। सरकार ने उनकी पत्नी को नौकरी दी और परिवार को घर भी मिला। आदिल की बहादुरी आज भी लोगों के लिए प्रेरणा है।
टूरिज्म पर गहरा असर, आजीविका संकट में
हमले का सबसे ज्यादा असर स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ा है। टूर गाइड, घोड़े वाले और टैक्सी ड्राइवर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई लोगों को अपने घोड़े और गाड़ियां तक बेचनी पड़ीं। जो काम पहले हजारों में होता था, अब 200-500 रुपये रोज तक सिमट गया है। EMI न भर पाने की वजह से कई लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
टूरिस्ट अब भी अधूरे अनुभव के साथ लौटते हैं
बैसरन घाटी और चंदनवाड़ी जैसे प्रमुख स्पॉट बंद होने की वजह से टूरिस्ट को पूरा अनुभव नहीं मिल पा रहा है। गाइड अब उन्हें आसपास के इलाकों जैसे कनहमर्ग तक ही ले जा पाते हैं। इससे टूरिस्ट भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते और जल्दी लौट जाते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर से लिया बदला
हमले के 15 दिन बाद भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” चलाकर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। इसमें अब्दुल रऊफ अजहर भी शामिल था, जो कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल रहा था।
सुरक्षा बनाम आजीविका
एक साल बाद पहलगाम में सुरक्षा व्यवस्था पहले से मजबूत हुई है, लेकिन टूरिज्म अब भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटा है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि कम से कम कुछ प्रमुख स्पॉट जल्द खोले जाएं ताकि उनकी आजीविका वापस पटरी पर आ सके। वहीं सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं।
घाव अभी भी ताजा
पहलगाम हमले को एक साल हो चुका है, लेकिन उसके जख्म अब भी भरे नहीं हैं। सुरक्षा में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन आर्थिक और सामाजिक स्तर पर कई चुनौतियां अब भी बाकी हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कब बैसरन घाटी फिर से खुलेगी और क्या पहलगाम अपनी पुरानी पहचान वापस पा सकेगा।