Nashik TCS Conversion : मुंबई। आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट से जुड़े जबरन धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न मामले में नया मोड़ सामने आया है। इस केस में आरोपी 25 वर्षीय निदा खान इस समय मुंबई में हैं और उनके परिवार के अनुसार वह अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रही हैं।
अग्रिम जमानत के लिए अदालत पहुंची निदा खान
फरार चल रही निदा खान ने नासिक की एक स्थानीय अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी चिकित्सा स्थिति को भी इस आवेदन में अहम आधार बनाया है। वहीं, पुलिस और जांच एजेंसियां इन दावों की आधिकारिक मेडिकल जांच के जरिए पुष्टि करने की तैयारी में हैं।
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SIT की जांच जारी, गिरफ्तारी के प्रयास तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) लगातार निदा खान को हिरासत में लेने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है।
नासिक टीसीएस ऑफिस में 9 शिकायतों की जांच
पुलिस के अनुसार, नासिक स्थित टीसीएस कार्यालय में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़ी कुल नौ शिकायतों की जांच की जा रही है। यह शिकायतें आठ महिला कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई हैं। घटनाएं फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच की बताई गई हैं।
7 कर्मचारियों की गिरफ्तारी, HR प्रमुख भी शामिल
अब तक पुलिस ने इस मामले में छह पुरुष कर्मचारियों और एक महिला एचआर प्रमुख सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दानिश शेख, तौसीफ अत्तर, रजा मेमन, शाहरुख कुरेशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और एचआर प्रमुख अश्विनी चैनानी के रूप में हुई है। इन सभी कर्मचारियों को कंपनी ने निलंबित कर दिया है।
पीड़ितों ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायत करने वाली महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उनके वरिष्ठ सहयोगियों ने मानसिक और यौन उत्पीड़न किया। साथ ही, मानव संसाधन विभाग ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया। पुलिस के मुताबिक, एक आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाए, जबकि अन्य ने अनुचित व्यवहार और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।
धर्म से जुड़े आरोप भी सामने आए
पुलिस ने यह भी बताया कि एक आरोपी ने एक पुरुष कर्मचारी को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया और उसके धर्म का अपमान किया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब उन्होंने कंपनी के उच्च अधिकारियों से मौखिक शिकायत की, तब भी उचित कार्रवाई नहीं की गई।
टीसीएस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का दावा
मामले पर कंपनी ने बयान जारी करते हुए कहा कि उत्पीड़न और जबरदस्ती के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि जैसे ही मामले की जानकारी मिली, तत्काल कार्रवाई की गई और संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया।
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टाटा संस चेयरमैन ने जताई चिंता
एन चंद्रशेखरन ने इस मामले को “बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक” बताया है। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाने और जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में विस्तृत जांच की जा रही है।
जांच के नतीजों पर आगे की कार्रवाई तय
कंपनी के अनुसार, स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया जा रहा है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी। फिलहाल इस पूरे मामले में SIT की जांच जारी है और सभी की नजरें आने वाले फैसलों पर टिकी हैं।