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Varanasi Shootout Case : बाहुबली धनंजय सिंह पर हमले के मामले में 24 साल बाद फैसला, विधायक अभय सिंह समेत 3 बरी

Varanasi Shootout Case

Varanasi Shootout Case : उत्तर प्रदेश। वाराणसी की एमपी/एमएलए विशेष अदालत ने 15 अप्रैल 2026 को बहुचर्चित टकसाल सिनेमा शूटआउट मामले में अहम और बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले में मुख्य आरोपी अभय सिंह समेत तीन लोगों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

यह मामला पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हुए जानलेवा हमले से जुड़ा था, जो उस समय प्रदेश की राजनीति और कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर उभरा था। इस फैसले के साथ ही करीब दो दशक से अधिक समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का एक अहम पड़ाव पूरा हो गया है।

2002 में हुआ था जानलेवा हमला

यह सनसनीखेज घटना 4 अक्टूबर 2002 की शाम करीब 6 बजे की है, जब धनंजय सिंह अस्पताल से जौनपुर लौट रहे थे। उसी दौरान वाराणसी के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने उनके काफिले को निशाना बनाया और एके-47 जैसे स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

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इस अचानक हुए हमले से पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। फायरिंग में धनंजय सिंह के साथ उनके गनर और ड्राइवर सहित कुल 5 लोग घायल हो गए थे, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी। उस समय इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी।

लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला

इस मामले में वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन, बचाव और वादी पक्ष के बीच लंबी बहस हुई। 13 अप्रैल 2026 को अदालत ने सभी पक्षों को लिखित दलीलें और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। धनंजय सिंह के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी ने अदालत से आरोपियों के लिए कड़ी सजा, यहां तक कि उम्रकैद की मांग की थी, क्योंकि इस हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

वहीं बचाव पक्ष ने अपने तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को निर्दोष बताया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे बाद में सुनाया गया।

साक्ष्यों के अभाव में मिली राहत

अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिसके कारण उन्हें दोषी ठहराना संभव नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने मुख्य आरोपी अभय सिंह सहित तीनों आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।

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इससे पहले भी इसी मामले में विनीत सिंह समेत चार अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में राहत मिल चुकी थी। इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि लंबे समय तक चले इस केस में अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा।

हमले में कई लोग हुए थे घायल

इस हमले में धनंजय सिंह को बाएं हाथ में गोली लगी थी, जबकि उनके सुरक्षाकर्मी वासुदेव पांडेय और ड्राइवर दिनेश गुप्ता भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद सभी घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज किया गया।

उस समय इस हमले को बेहद सुनियोजित और खतरनाक माना गया था। मुख्य आरोपी अभय सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया था, जो इस केस की गंभीरता को दर्शाता है।

फैसले के बाद मिली-जुली प्रतिक्रिया

करीब 22 साल पुराने इस चर्चित और संवेदनशील मामले में आए इस फैसले के बाद अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आरोपियों के खेमे में राहत और संतोष का माहौल है, जबकि वादी पक्ष इस निर्णय से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखाई दे रहा है और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देने की संभावना जताई जा रही है।

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इस केस को उस समय बाहुबली नेताओं के बीच आपसी रंजिश और कथित गैंगवार के रूप में देखा जाता था। अब इस फैसले के साथ एक लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद का महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त होता नजर आ रहा है, लेकिन आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी सबकी नजर बनी हुई है।

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