MP Religious Tourism : भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक में प्रदेश की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। बैठक का मुख्य उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना, विरासत स्थलों का संरक्षण करना और ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक सुविधाओं के साथ विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है। सरकार इन परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटन, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
ओरछा, मांडू और ग्वालियर किले की परियोजनाओं पर विशेष समीक्षा
बैठक की शुरुआत ओरछा में चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा से होगी। इसके बाद सिटी म्यूजियम की प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी। सरकार मांडू को “ए मीडीवल वंडर” के रूप में विकसित करने की योजना पर भी विस्तार से विचार करेगी।
इस परियोजना के तहत ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण, नाइट टूरिज्म को बढ़ावा और डिजिटल तकनीक के माध्यम से पर्यटकों को नया अनुभव देने की तैयारी की जा रही है।
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वहीं ग्वालियर किले के संरक्षण और विकास को लेकर आगा खान ट्रस्ट और इंडिगो की ओर से प्रस्तुति भी दी जाएगी, जिसमें किले को आधुनिक सुविधाओं के साथ विरासत पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना शामिल रहेगी।
महेश्वर, राजवाड़ा और लालबाग पैलेस के विकास पर होगी चर्चा
मुख्यमंत्री महेश्वर विकास परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा करेंगे। इस योजना के तहत नर्मदा घाटों, मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
इंदौर के ऐतिहासिक लालबाग पैलेस के भविष्य के संचालन और ‘एडॉप्टिव रीयूज’ मॉडल पर भी चर्चा होगी, ताकि इस धरोहर का उपयोग संग्रहालय, सांस्कृतिक केंद्र या सार्वजनिक गतिविधियों के लिए किया जा सके।
इसके साथ ही राजवाड़ा में प्रस्तावित इमर्सिव एक्सपीरियंस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर भी विचार किया जाएगा, जिसमें आधुनिक डिजिटल तकनीक और 3D प्रोजेक्शन के जरिए होल्कर इतिहास को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने की योजना है।
भोपाल, उज्जैन और चित्रकूट की परियोजनाओं को मिलेगा नया स्वरूप
बैठक में भोपाल स्थित राज्य संग्रहालय में प्रस्तावित लाइट एंड साउंड शो की प्रगति की समीक्षा भी होगी। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदेश के इतिहास और संस्कृति को नए अंदाज में प्रस्तुत करना है।
उज्जैन स्थित वीर दुर्गादास राठौड़ की छत्री में डिजिटल इमर्सिव अनुभव विकसित करने की योजना पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा चित्रकूट के परिक्रमा पथ, भारत घाट और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी, ताकि धार्मिक यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
सरस्वती लोक, नर्मदा लोक और सांची संग्रहालय पर रहेगा विशेष ध्यान
बैठक में धार में प्रस्तावित सरस्वती लोक परियोजना पर भी विस्तार से चर्चा होगी। यह परियोजना राजा भोज, भोजशाला और मां सरस्वती की विरासत पर आधारित एक आधुनिक ज्ञान एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी। यहां डिजिटल संग्रहालय, शोध केंद्र और आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
अमरकंटक में प्रस्तावित नर्मदा लोक परियोजना के तहत मां नर्मदा उद्गम स्थल का सौंदर्यीकरण, घाट विकास, लाइट एंड साउंड शो और पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
वहीं सांची रिलिक्स म्यूजियम को विश्वस्तरीय डिजिटल संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षण और प्रदर्शन किया जाएगा।
राम पथ गमन और श्रीकृष्ण पथेय परियोजनाओं पर बनेगी रणनीति
बैठक के अंतिम चरण में भगवान श्रीराम के राम पथ गमन और श्रीकृष्ण पथेय परियोजनाओं का कॉन्सेप्ट प्रेजेंटेशन मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों को एक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करना है।
सरकार का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी, प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे। इन सभी योजनाओं के माध्यम से मध्य प्रदेश को धार्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।