MP Mining Scam : ग्वालियर। मध्य प्रदेश में अवैध खनन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। करोड़ों रुपये की बकाया पेनल्टी वसूल नहीं किए जाने और डिफॉल्टरों को दोबारा खनन लीज देने के मामले में कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा कि जब नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछे कड़े सवाल
जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डबल बेंच ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार से कई अहम सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि अवैध खनन करने वालों से 305 करोड़ 97 लाख रुपये की पेनल्टी अब तक क्यों नहीं वसूली गई।
साथ ही यह भी जानना चाहा कि बकाया राशि होने के बावजूद ऐसे लोगों को नई खनन लीज और पुरानी लीज का नवीनीकरण किस आधार पर दिया गया। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को होगी।
2017 से लंबित है करोड़ों की वसूली
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2017 से खनन माफिया पर 305 करोड़ 97 लाख रुपये की पेनल्टी बकाया है। नियमों के अनुसार जुर्माना जमा नहीं करने वाले खदान संचालकों को ब्लैकलिस्ट कर उनकी खनन गतिविधियां रोक दी जानी चाहिए थीं लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें राहत दी गई और नियमों की अनदेखी की गई।
अवैध खनन से पर्यावरण और राजस्व को नुकसान
याचिकाकर्ता के अनुसार ग्वालियर जिले के बिलौआ और बेरजा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ है। यहां काले पत्थर के उत्खनन के लिए कई स्थानों पर जमीन को लगभग 100 फीट तक खोद दिया गया, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा।
जांच में बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन सामने आने के बावजूद कार्रवाई प्रभावी नहीं रही। आरोप है कि करोड़ों रुपये का राजस्व सरकारी खजाने में जाने के बजाय खनन माफिया तक पहुंच गया।