Ken-Betwa Project Protest: देश की सबसे बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में है। छतरपुर और पन्ना के प्रभावित आदिवासी परिवार बरार नदी में चिता आंदोलन, जल सत्याग्रह और सांकेतिक फांसी सत्याग्रह कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उन्हें नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला, जबकि प्रशासन सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत पूरी होने का दावा कर रहा है।
क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना?
करीब 44,605 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य केन नदी का पानी बेतवा नदी तक पहुंचाकर बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की समस्या दूर करना है। परियोजना के तहत कई गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में परिवारों का विस्थापन हो रहा है।
आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई?
अप्रैल 2026 में प्रभावित ग्रामीणों ने उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए आंदोलन शुरू किया। जय किसान संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में बरार नदी किनारे प्रदर्शन हुआ। प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन कुछ समय के लिए रुका, लेकिन मांगें पूरी नहीं होने का आरोप लगाकर इसे फिर शुरू कर दिया गया।
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आंदोलन फिर क्यों भड़क गया?
आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने अपने वादे पूरे नहीं किए। कई परिवारों के मकान तोड़े गए और आंदोलन से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की गई। इसके विरोध में आंदोलन ने चिता आंदोलन, जल सत्याग्रह और सांकेतिक फांसी सत्याग्रह का रूप ले लिया।
बरार नदी में जारी है चिता आंदोलन
किशनगढ़ के पास बरार नदी में प्रभावित परिवार कई दिनों से डटे हुए हैं। महिलाएं और पुरुष जल सत्याग्रह कर रहे हैं, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी चिताओं पर बैठकर और गले में फंदा डालकर सांकेतिक विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
क्या हैं आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें?
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि राहत राशि नियमों के अनुरूप नहीं दी गई और मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार हुआ है। उनकी मांग है कि पात्र लोगों को उचित राहत मिले, सर्वे दोबारा कराया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
अमित भटनागर ने लगाए गंभीर आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का आरोप है कि परियोजना में राहत राशि वितरण में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
प्रशासन का क्या कहना है?
प्रशासन का दावा है कि प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा और विशेष राहत पैकेज दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि आंदोलनकारी इन दावों से सहमत नहीं हैं।
अब आगे क्या?
फिलहाल बरार नदी में आंदोलन जारी है। अब यह विवाद केवल मुआवजे तक सीमित नहीं, बल्कि विस्थापन, पुनर्वास और आदिवासी अधिकारों का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत या आंदोलन की दिशा पर सभी की नजर बनी हुई है।