हाइलाइट्स
- मेरठ की IIMT यूनिवर्सिटी में MBA छात्रा अनु गुप्ता की संदिग्ध मौत।
- छात्रावास निदेशक और दो महिला वार्डन को सस्पेंड ।
- मामले की जांच के लिए 13 सदस्यीय समिति का गठन।
- छात्राओं ने मानसिक उत्पीड़न और खराब सुविधाओं के लगाए आरोप।
IIMT Meerut Student Death : उत्तर प्रदेश। मेरठ की IIMT यूनिवर्सिटी में MBA छात्रा अनु गुप्ता की संदिग्ध मौत के बाद पूरे कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है। इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छात्रावास निदेशक और दो महिला वार्डन को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इन पर छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। यह समिति जांच करेगी कि छात्रा की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और वजह थी।
अनु गुप्ता की मौत के बाद छात्र-छात्राओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। यूनिवर्सिटी गेट पर छात्रों ने देर रात तक धरना प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों का कहना है कि कॉलेज प्रशासन लंबे समय से छात्राओं पर मानसिक दबाव बना रहा था। इसी कारण यह दर्दनाक घटना हुई।
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महिला आयोग ने हॉस्टल पहुंचकर की जांच
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य Dr. मीनाक्षी भराला गुरुवार को यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचीं। उन्होंने छात्रा अनु गुप्ता का कमरा देखा। कमरे की दीवार पर “Hope” लिखा हुआ मिला। छात्राओं ने बताया कि अनु जीना चाहती थी, लेकिन उसे लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। छात्राओं ने दावा किया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से उस पर 30 हजार रुपए की अटेंडेंस फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था।
छात्राओं ने हॉस्टल की खराब सुविधाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि कमरों में सीलन और बदबू रहती है। पीने के लिए साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है। भीषण गर्मी में भी कूलर की व्यवस्था नहीं की गई। खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है और कई बार खाने में कीड़े मिलने की शिकायत भी सामने आई है।
चेहरे पर चोट के निशान मिलने से बढ़ा शक
20 मई को अनु गुप्ता का शव यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल के नीचे बने जिम के बाहर खून से लथपथ हालत में मिला था। वह हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर स्थित रूम नंबर 67 में रहती थी। सबसे पहले हॉस्टल में काम करने वाली मेड ने शव देखा और अन्य छात्राओं को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। मृतका के चेहरे पर चोट के निशान मिलने के बाद मामला और ज्यादा गंभीर हो गया। छात्रा के पिता ओमकार गोयल ने गंगानगर थाने में यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कराया है। परिवार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मानसिक उत्पीड़न से परेशान थी अनु
सहारनपुर निवासी अनु के पिता ने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि उनकी बेटी पढ़ाई में बेहद अच्छी थी और उसका प्लेसमेंट भी हो चुका था। उसे जल्द ही चंडीगढ़ की एक कंपनी ज्वाइन करनी थी। लेकिन कॉलेज प्रशासन उस पर लगातार अटेंडेंस सर्टिफिकेट के बदले 30 हजार रुपए जमा करने का दबाव बना रहा था।
परिजनों का आरोप है कि अनु लगातार तनाव में थी। कॉलेज प्रशासन की प्रताड़ना और मानसिक दबाव ने उसे कमजोर कर दिया था। परिवार ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और अगर किसी की लापरवाही या उत्पीड़न सामने आता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिक्षक पर लगे देर रात हॉस्टल में घुसने के आरोप
मामले के बीच छात्रा आशा चौधरी का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में उसने आरोप लगाया कि शिक्षक डॉ. लखविंदर देर रात करीब 2 बजे गर्ल्स हॉस्टल में पहुंचे थे और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार किया। छात्राओं का कहना है कि जब पैरेंट्स को हॉस्टल में प्रवेश की अनुमति नहीं है तो पुरुष स्टाफ को देर रात हॉस्टल में आने की इजाजत क्यों दी गई।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि शिकायत करने पर उन्हें धमकाया गया। मामले के तूल पकड़ने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने डॉ. लखविंदर सिंह समेत दो महिला वार्डन को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है।
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13 सदस्यीय टीम करेगी पूरे मामले की जांच
छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच और आर्थिक सहायता के लिए दो अलग-अलग समितियां बनाई हैं। जांच समिति में यूनिवर्सिटी प्रशासन के सात सदस्य और छात्र प्रतिनिधियों के छह सदस्य शामिल किए गए हैं। यह समिति छात्रा की मौत के कारणों की गहराई से जांच करेगी।
इसके अलावा छात्रा के परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए एक अलग मुआवजा समिति भी बनाई गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।