Aayudh

MP Teachers Protest : TET अनिवार्यता के खिलाफ MP के हजारों शिक्षकों का प्रदर्शन, पंडाल फुल तो पेड़ों की छांव में धरना!

MP Teachers Protest

MP Teachers Protest : भोपाल, मध्य प्रदेश। भोपाल में शनिवार को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर बड़ा प्रदर्शन हुआ। भेल स्थित दशहरा मैदान में ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ के तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए करीब 50 हजार से अधिक शिक्षक एकत्र हुए। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम (MP Nagar SDM) को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन समाप्त किया। अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो जून में फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। परीक्षा के लिए समय देने की मांग संयुक्त मोर्चा के संयोजक जगदीश यादव ने कहा कि यदि सरकार परीक्षा लेना चाहती है, तो शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उन्हें जनगणना जैसे कार्यों में न लगाया जाए। उन्होंने साफ कहा कि पहले से कार्यरत शिक्षकों को दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) देने के लिए मजबूर करना गलत है। शिक्षकों का तर्क है कि नियुक्ति के समय सभी योग्यताएं पूरी की गई थीं, ऐसे में 20-25 साल की सेवा के बाद नई शर्तें थोपना न्यायसंगत नहीं है। DA Hike : सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले! 2% महंगाई भत्ता बढ़ोतरी को मंजूरी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बढ़ी चिंता शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से 90 से 95 प्रतिशत तक शिक्षक प्रभावित हुए हैं। खासकर वे शिक्षक, जो पहले अध्यापक संवर्ग में थे और बाद में शिक्षक संवर्ग में शामिल हुए। इन शिक्षकों ने कम वेतन से नौकरी शुरू की थी और आज भी पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवा अवधि की गणना जैसे मूल अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सेवा गणना को लेकर आरोप संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा की गणना नहीं कर रही है, जिससे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। अब TET को अनिवार्य करने से उन पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है और भविष्य में कम पेंशन व ग्रेच्युटी मिलने की आशंका भी बढ़ गई है। Wheat Procurement : मध्यप्रदेश के किसानों को बड़ी राहत! स्लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल तक बढ़ी भीड़ के कारण मैदान छोटा पड़ा दशहरा मैदान में भारी भीड़ के कारण पंडाल छोटा पड़ गया और कई शिक्षकों को पेड़ों की छांव में बैठना पड़ा। दूर-दराज से आए प्रदर्शनकारियों को पुलिस बैरिकेडिंग के चलते अपने वाहन पहले ही रोकने पड़े और उन्हें पैदल ही मैदान तक पहुंचना पड़ा। पहले भी हो चुके हैं चरणबद्ध आंदोलन गौरतलब है कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर भी प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उसी कड़ी में अब राजधानी में राज्य स्तरीय प्रदर्शन आयोजित किया गया। Women Reservation Bill : 12 साल में पहली बार बिल पास कराने में नाकाम मोदी सरकार, पक्ष में मिले 298 वोट ज्ञापन सौंपकर समाप्त हुआ प्रदर्शन प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम एल.के. खरे को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। इसके साथ ही दिनभर चला यह बड़ा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया। यहां देखें प्रदर्शन की वीडियो

Sonia Gandhi FIR : राहुल के बाद अब सोनिया गांधी के खिलाफ FIR की मांग,कोर्ट ने लिखित में मांगा जवाब

Sonia Gandhi FIR

Sonia Gandhi FIR : नई दिल्ली। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट (Delhi Rouse Avenue Court) में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर (FIR Against Sonia Gandhi) दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर शनिवार को सुनवाई हुई। इस मामले में शिकायतकर्ता वकील विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में अपनी दलीलें पेश कीं और पुलिस जांच की मांग दोहराई। क्या हैं शिकायतकर्ता के आरोप विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में कहा कि जब वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम शामिल किया गया था, तब उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं मिली थी। उन्होंने आशंका जताई कि संभव है कि फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी के आधार पर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा गया हो। उनका कहना है कि अगर चुनाव आयोग को गलत जानकारी दी गई है, तो यह कानूनन अपराध है और इसकी जांच होनी चाहिए। Rahul Gandhi FIR : राहुल गांधी पर FIR दर्ज करने का आदेश, दोहरी नागरिकता केस में बढ़ी मुश्किलें 1980 में नाम जुड़ने का दावा याचिकाकर्ता के अनुसार, सोनिया गांधी का नाम 1980 में ही वोटर लिस्ट में शामिल हो गया था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता 1983 में मिली थी। शिकायत में कहा गया है कि 1982 में नाम हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा जोड़ा गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर फर्जीवाड़े और राजनीतिक प्रभाव के आरोप लगाए गए हैं। मजिस्ट्रेट कोर्ट पहले कर चुका खारिज इस मामले में पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट याचिका को खारिज कर चुका है। अब याचिकाकर्ता ने इस आदेश को सेशन कोर्ट में चुनौती दी है और आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की है। सोनिया गांधी का पक्ष सोनिया गांधी की ओर से दाखिल जवाब में आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया गया है। उनका कहना है कि यह याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। PM Modi Address : पीएम मोदी आज रात देश को करेंगे संबोधित, महिला आरक्षण बिल पर बोलेंगे! उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता से जुड़े मामले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और वोटर लिस्ट से जुड़े विवाद चुनाव आयोग के दायरे में आते हैं। ऐसे में किसी आपराधिक अदालत का इसमें दखल देना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को दिया समय कोर्ट ने दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता को चुनाव आयोग से जुड़े दस्तावेज पेश करने की अनुमति भी दी गई है। अगली सुनवाई की तारीख तय मामले में अगली सुनवाई 6 मई को होगी, जहां सोनिया गांधी के वकील अपनी दलीलें रखेंगे। वहीं दूसरी ओर एक अन्य तारीख 16 मई का भी उल्लेख है, जिस दिन आगे की सुनवाई हो सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट यह तय करेगा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा जाए या नहीं। DA Hike : सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले! 2% महंगाई भत्ता बढ़ोतरी को मंजूरी पहले भी हो चुकी है आंशिक सुनवाई इससे पहले 30 मार्च को इस मामले की आंशिक सुनवाई हुई थी, जिसके बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई थी। अब इस मामले पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट आगे का फैसला करेगा।

PM Modi Address : पीएम मोदी आज रात देश को करेंगे संबोधित, महिला आरक्षण बिल पर बोलेंगे!

Prime minister narendra modi

PM Modi Address : नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शनिवार) रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। उनके इस संबोधन को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) अपने भाषण में हाल ही में लोकसभा में चर्चा में रहे महिला आरक्षण (Womens Reservation Bill) से जुड़े बिल पर अपनी बात रख सकते हैं। इसके अलावा सरकार के रुख और आगे की रणनीति को लेकर भी वह संकेत दे सकते हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संसद भवन में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में महिला आरक्षण बिल के गिरने पर गहरी निराशा जताई है। DA Hike : सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले! 2% महंगाई भत्ता बढ़ोतरी को मंजूरी पहले भी अहम मौकों पर कर चुके हैं संबोधन प्रधानमंत्री इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण मौकों पर रात 8 बजे देश को संबोधित कर चुके हैं। साल 2016 में नोटबंदी के दौरान उनका संबोधन काफी चर्चा में रहा था। इसके अलावा भी कई बड़े फैसलों के समय उन्होंने इसी तरह राष्ट्र को संबोधित किया है। लोकसभा में बिल पास नहीं हो सका शनिवार को लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस बिल के जरिए लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने और उनमें 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान था। मतदान के दौरान 528 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिसमें 298 ने पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया। बिल पास होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, जो पूरी नहीं हो सकी। Manipur Violence 2026 : क्या हो रहा मणिपुर में? इम्फाल में कर्फ्यू! मशाल लिए हजारों लोग सड़कों पर विपक्ष का डिलिमिटेशन पर विरोध विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे डिलिमिटेशन से जोड़ना गलत है। उनका आरोप है कि इससे दक्षिण भारत समेत कई क्षेत्रों के साथ अन्याय हो सकता है। इसी कारण विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध किया। पीएम मोदी ने जताई निराशा विधेयक पारित न होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निराशा व्यक्त की और विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को अपने इस फैसले के लिए जीवनभर पछताना पड़ेगा। यह टिप्पणी उन्होंने संसद भवन में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक के दौरान की। Women Reservation Bill : 12 साल में पहली बार बिल पास कराने में नाकाम मोदी सरकार, पक्ष में मिले 298 वोट एनडीए नेताओं की बैठक विधेयक गिरने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं की बैठक संसद भवन परिसर में हुई। इस बैठक में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सहयोगी दलों के नेता भी शामिल हुए। बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। प्रियंका गांधी ने इसे बताया ‘लोकतंत्र की जीत’ वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र और संविधान की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने की साजिश था, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर विफल कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को मौजूदा 543 सीटों के आधार पर लागू कर सकती है, और विपक्ष इसका समर्थन करेगा। प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है, जब महिला आरक्षण (Womens Reservation Bill) को लेकर संसद और राजनीति में लगातार बहस जारी है। ऐसे में उनके भाषण पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

DA Hike : सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले! 2% महंगाई भत्ता बढ़ोतरी को मंजूरी

DA Hike

DA Hike : नई दिल्ली। महंगाई के इस दौर में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता (DA) में 2% बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से लाखों कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में सीधा इजाफा होगा। सरकार का यह कदम बढ़ती कीमतों के बीच आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मददगार माना जा रहा है। कैबिनेट ने दी बढ़ोतरी को मंजूरी सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट मीटिंग में DA में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। इससे पहले अक्टूबर में DA को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था, जो जुलाई 2025 से लागू हुआ था। अब नई बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों की आय में और वृद्धि होगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। Congress Press Conference : हमें महिला विरोधी कहकर मसीहा नहीं बन सकते – महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा इस बढ़ोतरी का सीधा लाभ लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। उनकी मासिक आय बढ़ेगी, जिससे घरेलू खर्चों को संभालना आसान होगा। बढ़ती महंगाई के बीच यह फैसला बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। एरियर मिलने की संभावना आमतौर पर DA में बढ़ोतरी के साथ कर्मचारियों को एरियर (बकाया राशि) भी मिलता है। ऐसे में इस फैसले के बाद कर्मचारियों को एकमुश्त राशि मिलने की संभावना है, जो उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा साबित हो सकती है। Manipur Violence 2026 : क्या हो रहा मणिपुर में? इम्फाल में कर्फ्यू! मशाल लिए हजारों लोग सड़कों पर कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले कैबिनेट ने DA बढ़ोतरी के अलावा कुछ अन्य अहम फैसले भी लिए हैं। सॉवरेन मैरीटाइम फंड के लिए 13,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे जहाजों को सस्ती और स्थिर बीमा सुविधा मिल सके। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) को 2028 तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है और इसके लिए 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी मंजूर किया गया है। Wheat Procurement : मध्यप्रदेश के किसानों को बड़ी राहत! स्लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल तक बढ़ी 8वें वेतन आयोग की मांग तेज इसी बीच कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग को लेकर अपनी मांगें तेज कर दी हैं। एनसी-जेसीएम (NC-JCM) ने फिटमेंट फैक्टर 3.83 करने का प्रस्ताव दिया है। यदि यह लागू होता है तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है। इसके अलावा परिवार की परिभाषा में बदलाव, ज्यादा इंक्रीमेंट और महंगाई से जुड़े भत्तों में सुधार की मांग भी की गई है।

Congress Press Conference : हमें महिला विरोधी कहकर मसीहा नहीं बन सकते – महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी

Congress Press Conference

Congress Press Conference : नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने महिला आरक्षण से जुड़े घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से संघीय ढांचे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही थी, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर रोक दिया। उनके मुताबिक, जो कुछ हुआ वह संविधान और विपक्ष की एकता की जीत है। जल्दबाजी में लाया बिल प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि चुनावों के बीच जल्दबाजी में संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। उन्होंने कहा कि बिल का मसौदा सिर्फ एक दिन पहले सामने लाया गया, जिससे इसकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश बताते हुए कहा कि सरकार ने ऐसी रणनीति बनाई थी जिसमें बिल पास हो या गिर जाए, दोनों ही स्थिति में उसे राजनीतिक फायदा मिल सके। Women Reservation Bill : 12 साल में पहली बार बिल पास कराने में नाकाम मोदी सरकार, पक्ष में मिले 298 वोट ‘महिलाओं का मसीहा’ बनने की कोशिश का आरोप उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सत्ता में बने रहने के लिए महिलाओं को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया और खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करने की कोशिश की। प्रियंका गांधी ने हाथरस, मणिपुर और महिला खिलाड़ियों के मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। परिसीमन के जरिए राजनीतिक संतुलन प्रियंका गांधी ने कहा कि यह प्रस्ताव असल में महिला आरक्षण से ज्यादा परिसीमन से जुड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए देश के राजनीतिक संतुलन को बदलने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने एकजुट होकर इस प्रयास को विफल किया, जो लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। ‘ब्लैक डे’ सरकार के लिए झटका उन्होंने ‘ब्लैक डे’ को लेकर कहा कि यह दिन सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ है। प्रियंका गांधी ने मांग की कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व मिल सके। Manipur Violence 2026 : क्या हो रहा मणिपुर में? इम्फाल में कर्फ्यू! मशाल लिए हजारों लोग सड़कों पर PR और मीडियाबाजी पर भी उठाए सवाल प्रियंका गांधी ने कहा कि आज की जनता और महिलाएं जागरूक हैं और केवल प्रचार या पीआर से सच्चाई नहीं बदली जा सकती। उन्होंने कहा कि देश बदल चुका है और लोगों का भरोसा केवल ठोस कामों से ही जीता जा सकता है। सरकार की रणनीति पर टिप्पणी बीजेपी के महिला मोर्चा अभियान पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जनता सब समझती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को पहले से पता था कि यह बिल पास नहीं होगा और उसी के अनुसार राजनीतिक रणनीति तैयार की गई थी। ‘मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान का जिक्र प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस ने ‘मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान के जरिए महिलाओं को सशक्त करने की कोशिश की थी। उत्तर प्रदेश में पार्टी ने 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को दिए थे, हालांकि चुनाव में केवल एक महिला उम्मीदवार ही जीत सकी। Women’s Reservation Bill : महिला आरक्षण कानून लागू, देर रात नोटिफिकेशन जारी; जानिये क्या है इसके मायने OBC कोटा की वकालत महिला आरक्षण में अल्पसंख्यक कोटा के सवाल पर उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन यह जरूर कहा कि इसमें ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए, ताकि उन्हें वास्तविक प्रतिनिधित्व मिल सके। प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण से विपक्ष चौंक गया था, क्योंकि उन्होंने कहा था कि जो सहमत नहीं होगा वह सदन में नहीं बैठ सकता। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा घटनाक्रम एक साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य सत्ता में बने रहना था। परिसीमन 2029 तक नहीं हो सकता, इसलिए इसे महिलाओं के नाम पर लाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सोचा था कि बिल पास होगा तो जीत, और नहीं होगा तो विपक्ष को महिला विरोधी बताकर खुद को मसीहा साबित किया जाएगा। उन्होंने अंत में कहा कि वह खुश हैं कि विपक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और इसे पारित नहीं होने दिया। Womens Reservation Bill : महिला आरक्षण बिल पर संसद में गरमाई बहस, अखिलेश बोले- BJP नारी को बना रही नारा सरकार को चुनौती और आगे की रणनीति प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस भी जनता के बीच जाएगी और यह संदेश देगी कि सरकार को 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हो तो उसमें संशोधन किया जा सकता है, लेकिन उसे लागू करना जरूरी है।

Manipur Violence 2026 : क्या हो रहा मणिपुर में? इम्फाल में कर्फ्यू! मशाल लिए हजारों लोग सड़कों पर

Manipur Violence 2026

Manipur Violence 2026 : इंफाल। मणिपुर एक बार फिर से हिंसा और विरोध प्रदर्शनों की चपेट में है। 7 अप्रैल को विष्णुपुर में हुए बम धमाके में दो बच्चों की मौत के बाद लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस घटना के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। हाथों में मशालें लेकर लोग नारेबाजी कर रहे हैं और जगह-जगह रैलियां निकाली जा रही हैं। CM आवास और पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा विरोध गुरुवार शाम से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों की आंच इम्फाल में मुख्यमंत्री आवास और पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गई। हालात को देखते हुए प्रशासन ने इम्फाल में कर्फ्यू लागू कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। Manipur Violence Update : मणिपुर हिंसा के बाद इन 5 जिलों में नो इंटरनेट, 5 साल और 6 महीने की बच्ची की मौत के बाद वबाल कर्फ्यू के बीच महिलाओं का बड़ा प्रदर्शन शुक्रवार रात को इम्फाल पूर्व के खुरई लामलॉन्ग बाजार में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। कर्फ्यू के बावजूद लोग सड़कों पर उतरे और रैलियां निकालीं। इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं। इस दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई। आंसू गैस और रबर बम से भीड़ को हटाया प्रदर्शनकारी बच्चों को न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और रबर बम का इस्तेमाल किया। इस झड़प में कई लोग घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए JNIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है। Manipur Violence : मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, कुकी उग्रवादियों ने घर पर फेंका बम, दो बच्चों समेत मां जिंदा जली NIA को सौंपी गई जांच इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई है। इसके बावजूद लोगों का गुस्सा कम नहीं हो रहा है। ट्रोंगलाओबी घटना को लेकर घाटी में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है और नागरिक समाज संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर बच्चों को न्याय नहीं मिला तो विरोध और तेज होगा। कर्फ्यू के बावजूद जारी विरोध प्रदर्शन इम्फाल पूर्व, इम्फाल पश्चिम, थौबल और काकचिंग जिलों में सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई है। वहीं बिष्णुपुर में केवल सुबह 5 बजे से 10 बजे तक ही छूट दी गई है। इसके बावजूद लोग सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे हैं और नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। सड़क जाम और बिगड़ते हालात बिष्णुपुर बाजार में प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को वापस लौटना पड़ा। घाटी के कई इलाकों में हालात खराब बने हुए हैं, जहां लगातार प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हो रही हैं। Manipuri Film Boong : मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने जीता BAFTA 2026 अवॉर्ड, जानिए क्या है कहानी और किस प्लेटफॉर्म पर देखें? स्कूल बंद, इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड बिगड़ते हालात को देखते हुए घाटी के कई जिलों में शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया है। साथ ही मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी सस्पेंड कर दी गई हैं, ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके। यहां देखिये वीडियो और फोटो

Akshaya Tritiya 2026 : क्या अक्षय तृतीया से पहले फिर बढ़ेंगे सोने के दाम? पहले ही करा लें बुक‍िंग

Gold Prices on Akshaya Tritiya 2026

Akshaya Tritiya 2026 : नई दिल्ली। अक्षय तृतीया 2026 19 अप्रैल को है और इस दिन सोना या चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। आमतौर पर इस मौके से पहले सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार शुक्रवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इससे सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों को राहत मिली है। आयात पर रोक हटने से आई गिरावट सोने के दाम में गिरावट का मुख्य कारण इसके आयात पर लगी रोक को हटाना है। भारतीय बैंकों ने विदेश से आने वाले सोने-चांदी के आयात पर रोक लगा रखी थी, जिससे कई टन की सप्लाई अटक गई थी। हालांकि अब सरकार ने आयात की अनुमति दे दी है, जिससे बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है और कीमतों पर असर पड़ा है। Wheat Procurement : मध्यप्रदेश के किसानों को बड़ी राहत! स्लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल तक बढ़ी बंदरगाहों पर फंसा था भारी स्टॉक सरकार की ओर से समय पर स्पष्ट आदेश नहीं आने के कारण 5 टन से अधिक सोना और 8 टन चांदी बंदरगाहों पर फंसी हुई थी। इससे अक्षय तृतीया के मौके पर बाजार में कमी की आशंका जताई जा रही थी। अब 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक बैंकों को आयात की अनुमति दे दी गई है। दो बैंकों को केवल सोना आयात करने की मंजूरी मिली है। सर्राफा बाजार में गिरावट का असर सरकार के फैसले का असर सर्राफा बाजार में तुरंत देखने को मिला। IBJA के अनुसार शुक्रवार शाम को 24 कैरेट सोने का दाम घटकर 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। वहीं चांदी में भी करीब 1400 रुपये की गिरावट आई और यह 2.50 लाख रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। विदेशी बाजार में फिर दिखी तेजी 18 अप्रैल की सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम में तेजी देखी गई। हाजिर सोना 45 डॉलर प्रति औंस बढ़कर 4,833 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 4,891.62 डॉलर प्रति औंस तक भी गया, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई। Women Reservation Bill : 12 साल में पहली बार बिल पास कराने में नाकाम मोदी सरकार, पक्ष में मिले 298 वोट क्या फिर बढ़ेंगे सोने के दाम? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में सहमति बनती है या अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों में फिर तेजी देखी जा सकती है। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) खुलने के बाद भी कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। बुलियन और MCX पर ताजा भाव बुलियन मार्केट में शुक्रवार को 24 कैरेट सोना 1,54,890 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि 22 कैरेट सोना 1,41,983 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। MCX पर सोना हल्की तेजी के साथ 1,54,605 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। देश के बड़े शहरों में सोने का भाव मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,54,200 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। लखनऊ, कानपुर और जयपुर में यह 1,54,350 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। चेन्नई में 1,55,020 रुपये, पटना और भोपाल में 1,54,250 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अक्षय तृतीया पर बिक्री का अनुमान साल 2025 में अक्षय तृतीया पर करीब 20 टन सोने की बिक्री हुई थी, जिसकी कीमत लगभग 12,000 करोड़ रुपये थी। इस साल महंगाई के बावजूद 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री का अनुमान जताया गया है। MP Teachers Protest : MP टीचर्स का भोपाल में TET अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन, सरकार ने दाखिल की रिव्यू पिटीशन सरकार ने देरी से क्यों दी अनुमति? सरकार की ओर से आयात में देरी का कारण व्यापार घाटा बताया गया है। आयात कम करने से देश का व्यापार घाटा कम होता है और इससे रुपये को मजबूती मिलती है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार 2025-26 में भारत ने करीब 6 लाख करोड़ रुपये का सोना आयात किया था। निवेशकों के लिए सलाह जानकारों का कहना है कि सोने में SIP के जरिए निवेश जारी रखना बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि बड़ा निवेश करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है।

Wheat Procurement : मध्यप्रदेश के किसानों को बड़ी राहत! स्लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल तक बढ़ी

Wheat Procurement Slot Booking Date

Wheat Procurement Slot Booking Date : भोपाल। मध्यप्रदेश में रबी सीजन के दौरान गेहूं उपार्जन की रफ्तार तेज बनी हुई है। किसानों को राहत देते हुए राज्य सरकार ने गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुकिंग की समय-सीमा 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दी है। इसका फायदा उन किसानों को मिलेगा, जो अभी तक किसी कारणवश अपना स्लॉट बुक नहीं करा सके हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ समय पर मिल सके। अब तक लाखों किसान उपार्जन प्रक्रिया से जुड़ चुके हैं और भुगतान भी सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाया जा रहा है। MP Teachers Protest : MP टीचर्स का भोपाल में TET अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन, सरकार ने दाखिल की रिव्यू पिटीशन अब तक 57 लाख क्विंटल से अधिक गेहूं की खरीदी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के मुताबिक, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से कुल 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में किसानों को 355 करोड़ 3 लाख रुपये से अधिक की राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है। भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल रखा गया है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। 30 अप्रैल तक स्लॉट बुकिंग की सुविधा जारी राज्य में गेहूं विक्रय को सुचारु बनाए रखने के लिए स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था लागू की गई है। अब तक 4 लाख 22 हजार 848 किसानों द्वारा 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक कराए जा चुके हैं। किसान 30 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं। प्रदेश में कुल 3171 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां कार्यालयीन दिवसों में खरीदी की जा रही है। Women Reservation Bill : 12 साल में पहली बार बिल पास कराने में नाकाम मोदी सरकार, पक्ष में मिले 298 वोट उपार्जन केंद्रों की क्षमता बढ़ाई किसानों की बढ़ती संख्या और उपज को देखते हुए सरकार ने उपार्जन केंद्रों की दैनिक खरीदी क्षमता में इजाफा किया है। पहले जहां प्रति केंद्र प्रतिदिन 1000 क्विंटल गेहूं की स्लॉट बुकिंग होती थी, उसे बढ़ाकर 1500 क्विंटल कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि केंद्र की क्षमता के अनुसार तौल हो सके और ज्यादा से ज्यादा किसानों से समय पर खरीदी की जा सके। केंद्रों पर किसानों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा का भी ध्यान रखा है। जिन जिलों में गेहूं खरीदी शुरू हो चुकी है, वहां केंद्रों पर छायादार बैठने की व्यवस्था, पीने का साफ पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही बारदाने, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता जांच उपकरण और गेहूं की सफाई के लिए पंखा व छनना जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। MP Heatwave Alert : मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी का कहर! 16 जिलों में लू का अलर्ट, स्कूलों के समय में बदलाव MSP और बोनस मिलाकर 2625 रुपये प्रति क्विंटल रबी विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलाकर किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। गेहूं उपार्जन के लिए आवश्यक बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था पहले से कर ली गई है। भंडारण और परिवहन की पुख्ता व्यवस्था उपार्जित गेहूं के सुरक्षित भंडारण के लिए जूट बारदाने के साथ-साथ पीपी/एचडीपी बैग और जूट के भर्ती बारदानों का उपयोग किया जा रहा है। अब तक 30 लाख 10 हजार 480 क्विंटल गेहूं का परिवहन किया जा चुका है। सरकार का दावा है कि भंडारण क्षमता को देखते हुए किसी भी स्तर पर गेहूं खराब होने की स्थिति नहीं आएगी। Rahul Gandhi FIR : राहुल गांधी पर FIR दर्ज करने का आदेश, दोहरी नागरिकता केस में बढ़ी मुश्किलें पंजीयन में नया रिकॉर्ड, लक्ष्य भी बढ़ा इस वर्ष प्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 लाख 60 हजार ज्यादा है। बीते रबी सीजन में करीब 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ था। इस बार सरकार ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य रखा है। सरकार का भरोसा है कि किसानों के सक्रिय सहयोग से यह लक्ष्य भी हासिल कर लिया जाएगा।

MP Teachers Protest : MP टीचर्स का भोपाल में TET अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन, सरकार ने दाखिल की रिव्यू पिटीशन

MP Teachers Protest

MP Teachers Protest : भोपाल, मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल में शनिवार को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। भेल स्थित दशहरा मैदान में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से शिक्षक ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ के लिए एकत्रित हो रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक, इस प्रदर्शन में 50 हजार से अधिक शिक्षकों की भागीदारी की संभावना जताई गई है। TET अनिवार्यता पर शिक्षकों का विरोध मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) देने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है। उनका तर्क है कि जब नियुक्ति के समय सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी कर ली गई थीं, तो 20-25 साल की सेवा के बाद नई शर्तें थोपना न्यायसंगत नहीं है। Women Reservation Bill : 12 साल में पहली बार बिल पास कराने में नाकाम मोदी सरकार, पक्ष में मिले 298 वोट सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से 90 से 95 प्रतिशत तक शिक्षक प्रभावित हुए हैं। इनमें अधिकांश वे शिक्षक शामिल हैं, जो अध्यापक से शिक्षक संवर्ग में आए हैं। इन शिक्षकों ने कम वेतनमान से अपनी सेवा शुरू की थी और अब भी पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवा अवधि की गणना जैसे मूल अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आर्थिक नुकसान और भविष्य की चिंता मोर्चा ने आरोप लगाया है कि सरकार पहले से ही नियुक्ति दिनांक से सेवा की गणना नहीं कर रही है, जिससे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। अब TET को अनिवार्य किए जाने से उन पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। साथ ही, यदि सेवा प्रभावित होती है तो कम पेंशन और ग्रेच्युटी मिलने की आशंका ने शिक्षकों की चिंता और बढ़ा दी है। MP Heatwave Alert : मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी का कहर! 16 जिलों में लू का अलर्ट, स्कूलों के समय में बदलाव चरणबद्ध आंदोलन के बाद राजधानी में प्रदर्शन मोर्चा के अनुसार, यह प्रदर्शन चरणबद्ध आंदोलन का हिस्सा है। इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर पर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन किए गए थे। अब उसी कड़ी में भोपाल में राज्य स्तरीय प्रदर्शन आयोजित किया गया है। मोर्चा के प्रांतीय संयोजक मनोहर दुबे, जगदीश यादव, भरत पटेल, राकेश दुबे, परमानंद डहरिया, डीके सिंगौर, राकेश नायक, शिल्पी सिवान, राकेश पटेल, शालिग्राम चौधरी, विश्वेश्वर झरिया, रमाशंकर पांडेय और सत्येंद्र तिवारी ने सभी शिक्षकों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल इसी बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर दी है। सुप्रीम कोर्ट की ई-फाइलिंग रसीद के अनुसार, यह याचिका 17 अप्रैल को शाम 4 बजे मध्य प्रदेश शासन की ओर से दर्ज की गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में सकारात्मक आश्वासन दिया था। इसके बाद सरकार द्वारा कानूनी प्रक्रिया शुरू करना इस मामले को प्राथमिकता देने का संकेत माना जा रहा है। Weather Update : गर्मी के बीच राजस्थान में ओले गिरे, यूपी में पारा 44°C पार; MP-CG में लू का अलर्ट मोर्चा की प्रतिक्रिया और सवाल अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के संयोजक राकेश दुबे ने रिव्यू पिटीशन का स्वागत किया है, लेकिन इसे शिक्षकों की मूल मांगों से अलग बताया है। उनका कहना है कि सरकार को अपना पक्ष रखने का अधिकार है, लेकिन रिव्यू पिटीशन के बावजूद शिक्षकों पर TET परीक्षा का दबाव बनाना समझ से परे है। क्या है TET परीक्षा? टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) कक्षा 1 से 8 तक के सरकारी शिक्षकों के लिए अनिवार्य पात्रता परीक्षा है। यह परीक्षा केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर आयोजित की जाती है, जिसे सेंट्रल TET (CTET) और स्टेट TET (STET) कहा जाता है। इसमें दो पेपर होते हैं, जिसमें पहला पेपर कक्षा 1 से 5 और दूसरा पेपर कक्षा 6 से 8 तक के लिए होता है। Amravati Video Scandal : अमरावती स्कैंडल में अब तक 4 आरोपी अरेस्ट, अयान का घर जमींदोज; ऐसे फंसाता था लड़कियों को 2010 से अनिवार्य है TET TET परीक्षा को वर्ष 2010 में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा अनिवार्य किया गया था। यह एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जो यह सुनिश्चित करती है कि अभ्यर्थी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने के योग्य है या नहीं। देश में सरकारी शिक्षकों की संख्या UDISE+ 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल 51 लाख सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें उत्तर प्रदेश में 16,15,427, राजस्थान में 7,92,265, मध्य प्रदेश में 7,17,493, बिहार में 7,07,516, छत्तीसगढ़ में 2,85,248 और उत्तराखंड में 1,34,263 शिक्षक शामिल हैं।

Women Reservation Bill : 12 साल में पहली बार बिल पास कराने में नाकाम मोदी सरकार, पक्ष में मिले 298 वोट

Women Reservation Bill

Women Reservation Bill : नई दिल्ली। लोकसभा में मोदी सरकार को एक बड़ा झटका लगा है। पिछले 12 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है जब सरकार कोई अहम विधेयक सदन में पास कराने में नाकाम रही। लोकसभा सीटों को बढ़ाने से जुड़े संविधान के 131वें संशोधन बिल पर हुई वोटिंग में सरकार के पक्ष में सिर्फ 298 वोट ही मिल पाए, जो आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से काफी कम थे। बता दें कि, इस बिल में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया था। लंबे समय तक चली चर्चा और वोटिंग के बाद यह विधेयक आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका। Rahul Gandhi in Parliament : राहुल गांधी का PM मोदी पर ‘बालाकोट के जादूगर’ वाला कटाक्ष, संसद में हंगामा बिल पर 21 घंटे तक हुई चर्चा सदन में इस बिल पर करीब 21 घंटे तक चर्चा हुई। इसके बाद हुई वोटिंग में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। इनमें से 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में और 230 सांसदों ने विरोध में वोट दिया। हालांकि, इस बिल को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, जो कि 352 वोट होता है। इस तरह यह विधेयक 54 वोटों से गिर गया। सीधा असर महिला आरक्षण पर मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब सरकार लोकसभा में कोई विधेयक पारित नहीं करा सकी। इसका सीधा असर महिला आरक्षण पर पड़ेगा। अब नई जनगणना के परिणाम आने से पहले महिला आरक्षण लागू नहीं हो पाएगा, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल सकेगा। Lok Sabha Delimitation Controversy : लोकसभा सीटें कैसे होंगी 850? गृहमंत्री अमित शाह ने दिया गणित ये दोनों विधेयक पहले बिल से जुड़े सरकार ने इस दौरान दो अन्य विधेयकों को वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किया। इनमें परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 शामिल हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ये दोनों विधेयक पहले बिल से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन पर अलग से वोटिंग की जरूरत नहीं है। तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए विशेष सत्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए बुलाया था। इनमें 131वां संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक शामिल थे। 131वें संशोधन में राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सीटें प्रस्तावित की गई थीं। बिल पास कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत वोटिंग के आंकड़ों पर नजर डालें तो एनडीए के पास 293 सांसद थे और उसे बिल पास कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी। सरकार केवल 5 अतिरिक्त सांसदों का समर्थन जुटा पाई और विपक्ष को अपने पक्ष में करने में सफल नहीं हो सकी। यही वजह रही कि बिल पारित नहीं हो पाया। Women’s Reservation Bill : महिला आरक्षण कानून लागू, देर रात नोटिफिकेशन जारी; जानिये क्या है इसके मायने पिछले 24 वर्षों में पहला मौका यह पिछले 24 वर्षों में पहला मौका है जब संसद में कोई सरकारी विधेयक गिरा है। इससे पहले 2002 में आतंकवाद निरोधक कानून (पोटा) संसद में पारित नहीं हो पाया था। वहीं, 1990 के बाद यह पहला संविधान संशोधन विधेयक है जो लोकसभा में गिरा है। महिला आरक्षण और परिसीमन कनेक्टेड महिला आरक्षण और परिसीमन का आपस में गहरा संबंध है। महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और विधानसभा की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी हैं, लेकिन इसके लिए परिसीमन जरूरी है। परिसीमन के तहत जनसंख्या के आधार पर सीटों की संख्या और सीमाएं तय की जाती हैं। अब यह प्रक्रिया नई जनगणना के बाद ही आगे बढ़ सकेगी, जिससे महिला आरक्षण का लाभ 2034 के लोकसभा चुनाव तक ही मिल पाएगा। अगर यह बिल पास हो जाता, तो सभी राज्यों की लोकसभा सीटें करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ जातीं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में 80 सीटों की संख्या बढ़कर 120 हो जाती और इनमें से 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होतीं। विधेयक में बदलाव कर दोबारा पेश अब सरकार के सामने विकल्प है कि वह इस विधेयक में बदलाव कर दोबारा पेश करे या विपक्ष के सुझावों के साथ सहमति बनाने की कोशिश करे। वहीं, विपक्ष का कहना है कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक ताकत कम हो सकती है और यह ओबीसी तथा एससी-एसटी वर्गों के हितों के खिलाफ है। संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि उन्हें इस बिल का श्रेय नहीं चाहिए। वहीं, विपक्षी नेताओं ने सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए इस बिल को लाने का आरोप लगाया। Womens Reservation Bill का विरोध करने वाले लंबे समय तक कीमत चुकाएंगे – PM मोदी परिसीमन के बाद भी 24% सांसद दक्षिण से कर्नाटक की अभी 28 सीटें हैं, जो कुल 543 सीटों में से 5.15% है। परिसीमन के बाद कर्नाटक की 42 सीटें होंगी, जो कुल 816 सीटों में से 5.14% होगी। आंध्र प्रदेश की अभी 25 सीटें हैं, जो कुल 543 सीटों में से 4.60% है। परिसीमन के बाद आंध्र प्रदेश की 38 सीटें होंगी, जो कुल 816 सीटों में से 4.65% होगी। तेलंगाना की अभी 17 सीटें हैं, जो कुल 543 सीटों में से 3.13% है। परिसीमन के बाद तेलंगाना की 26 सीटें होंगी, जो कुल 816 सीटों में से 3.18% होगी। तमिलनाडु की अभी 39 सीटें हैं, जो कुल 543 सीटों में से 7.18% है। परिसीमन के बाद तमिलनाडु की 59 सीटें होंगी, जो कुल 816 सीटों में से 7.23% होगी। केरल की अभी 20 सीटें हैं, जो कुल 543 सीटों में से 3.68% है। परिसीमन के बाद केरल की 30 सीटें होंगी, जो कुल 816 सीटों में से 3.67% होगी। कुल मिलाकर दक्षिण के इन राज्यों की अभी 129 सीटें हैं, जो कुल 543 सीटों में से 24% है। परिसीमन के बाद इनकी 195 सीटें होंगी, जो कुल 816 सीटों में से भी 24% ही रहेगी। Amravati Video Scandal : अमरावती स्कैंडल में अब तक 4 आरोपी अरेस्ट, अयान का घर जमींदोज; ऐसे फंसाता था लड़कियों को महिला आरक्षण बिल