MP News: फर्जी महिला IAS तृप्ति सिंह पर चौथी FIR, होटल-रिसॉर्ट लीज के नाम पर 50 लाख की ठगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला किराए की इनोवा कार पर 'भारत सरकार' लिखवाकर चलती थी। भोपाल के बागमूगालिया स्थित उसके आवास से पुलिस ने फर्जी सीबीआई (CBI) पहचान पत्र, आधिकारिक लेटरहेड, फर्जी मुहरें और रुतबा दिखाने के लिए रखे गए कई स्मृति चिह्न (मोमेंटो) जब्त किए हैं।

MP News: फर्जी महिला आईएएस बनकर लाखों की ठगी करने वाली शातिर तृप्ति सिंह राजपूत के खिलाफ भोपाल में चौथी एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग (MPT) में ट्रेनी आईएएस और एडिशनल डायरेक्टर का फर्जी रुतबा दिखाकर लोगों को चूना लगाने वाली तृप्ति के ठगी सिंडिकेट पर पुलिस लगातार शिकंजा कस रही है।
पचमढ़ी और रातापानी रिसॉर्ट की लीज का झांसा देकर 50 लाख की ठगी
ताजा मामला भोपाल के बागसेवनिया थाना पुलिस में दर्ज हुआ है। सिवनी निवासी गगन उपवंशी की शिकायत के अनुसार, तृप्ति सिंह, उसके भाई सुधांशु सिंह और साथी प्रखर सिंह ने खुद को सीनियर प्रशासनिक अधिकारी बताकर भरोसा जीता। आरोपियों ने पीड़ित को पचमढ़ी, तवा और रातापानी स्थित प्रसिद्ध सरकारी होटल व रिसॉर्ट कम कीमत पर लीज पर दिलाने का दावा किया।
कागजी प्रक्रिया, जीएसटी, बायोमेट्रिक और हस्ताक्षर सत्यापन के नाम पर फरियादी से कुल ₹49.96 लाख ऐंठ लिए गए। लीज न मिलने और छानबीन करने पर जब पीड़ित को तृप्ति के फर्जीवाड़े का पता चला, तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
तृप्ति सिंह पर अब तक इन मामलों में केस दर्ज
- भोपाल (बागसेवनिया थाना): होटल लीज के नाम पर ₹49.96 लाख की ठगी।
- बालाघाट के कारोबारी से होटल लीज और नौकरी के नाम पर ₹39.17 लाख की धोखाधड़ी।
- अशोकनगर (चंदेरी थाना): खुद को आईएएस बताकर चंदेरी के कारोबारी से शादी और फिर ₹9.80 लाख की ठगी।
- सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों से ठगी की।
'भारत सरकार' लिखी कार और CBI का फर्जी I-कार्ड बरामद
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला किराए की इनोवा कार पर 'भारत सरकार' लिखवाकर चलती थी। भोपाल के बागमूगालिया स्थित उसके आवास से पुलिस ने फर्जी सीबीआई (CBI) पहचान पत्र, आधिकारिक लेटरहेड, फर्जी मुहरें और रुतबा दिखाने के लिए रखे गए कई स्मृति चिह्न (मोमेंटो) जब्त किए हैं।
रिमांड पर भोपाल लाने की तैयारी
आरोपी तृप्ति सिंह वर्तमान में अशोकनगर जेल में बंद है। भोपाल पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट (रिमांड) पर राजधानी लाने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, रिमांड मिलने के बाद उसके बैंक खातों, फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क और अन्य पीड़ितों के संबंध में कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।