Toxic Movie Review: Yash का दमदार स्वैग, लेकिन जरूरत से ज्यादा एक्शन ने कहानी को किया कमजोर; पढ़ें रिव्यू
Toxic Movie Review: यश की 'टॉक्सिक' में शानदार एक्शन, VFX और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस देखने को मिलता है। यश फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन लंबा रनटाइम, जरूरत से ज्यादा हिंसा और उलझी कहानी भावनात्मक असर कम कर देती है।

Toxic Movie Review: यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक' 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, रुक्मिणी वसंत, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और अक्षय ओबेरॉय अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म बड़े बजट, शानदार विजुअल्स और जबरदस्त एक्शन के बावजूद कहानी और भावनात्मक जुड़ाव के स्तर पर उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
क्या है 'टॉक्सिक' की कहानी?
बता दें, फिल्म की कहानी गोवा के अपराध और ड्रग्स सिंडिकेट के इर्द-गिर्द बुनी गई है। जहां सत्ता, परिवार, रिश्ते और बदले की चाह एक-दूसरे से टकराते हैं। कहानी का केंद्र राया है, जिसका किरदार यश ने निभाया है। राया अपराध की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका है और हिंसा उसके लिए ताकत का सबसे बड़ा जरिया है। राया की बहन गंगा उसके जीवन में बेहद खास स्थान रखती है। बचपन से भाई की देखभाल करने वाली गंगा उसके लिए सिर्फ बहन नहीं, बल्कि परिवार का मजबूत सहारा है। दूसरी ओर, राया का संपर्क अपराध जगत के प्रभावशाली व्यक्ति सल्वाडोर से होता है, जिसके बाद उसकी जिंदगी और ज्यादा खतरनाक मोड़ लेती है।
शादी के बीच शुरू होती है नई कहानी
वहीं सल्वाडोर अपनी बेटी रेबेका की शादी राया से कराकर क्राइम नेटवर्क को मजबूत करना चाहता है। राया भी इस रिश्ते के लिए तैयार होता है, लेकिन तभी उसकी जिंदगी में नादिया की एंट्री होती है। कियारा आडवाणी का किरदार नादिया एक सर्कस कलाकार है, जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ खतरनाक अंदाज के लिए भी जानी जाती है। राया और नादिया के बीच रिश्ता आगे बढ़ता है और यही संबंध पूरी कहानी को एक अलग दिशा में ले जाता है। प्यार, अपराध और सत्ता के इस मेल का असर राया के परिवार और उसके पूरे साम्राज्य पर पड़ता है।
एक्शन भरपूर, लेकिन कहानी पर पड़ा भारी
वहीं 'टॉक्सिक' की सबसे बड़ी ताकत इसका विजुअल ट्रीटमेंट है। फिल्म में बड़े स्तर पर एक्शन सीक्वेंस, हाई-एंड VFX और स्टाइलिश कैमरा वर्क देखने को मिलता है। यश का किरदार शुरुआत से अंत तक स्क्रीन पर छाया रहता है। हालांकि, फिल्म की कमजोरी भी यहीं से सामने आती है। लगातार एक्शन, गोलीबारी और हिंसक दृश्यों के बीच कहानी का भावनात्मक पक्ष दब जाता है। कई मौकों पर दर्शक किरदारों के साथ जुड़ने के बजाय यह समझने में उलझ जाता है कि कहानी किस दिशा में आगे बढ़ रही है।
रिश्तों में भावनात्मक गहराई की कमी
फिल्म में भाई-बहन, पिता-बेटी, पति-पत्नी और प्रेम जैसे कई रिश्तों को जगह दी गई है। इसके बावजूद अधिकांश रिश्ते दर्शकों पर वह भावनात्मक असर नहीं छोड़ पाते, जिसकी कहानी से उम्मीद की जाती है। फ्लैशबैक और वर्तमान समय के बीच कहानी के बार-बार आने-जाने से भी नैरेटिव थोड़ा जटिल हो जाता है। एक ट्रैक को समझने का मौका मिलता है, उससे पहले ही फिल्म एक नए एक्शन सीक्वेंस में पहुंच जाती है।
महिला किरदारों को मिला सीमित स्पेस
फिल्म में कई प्रमुख महिला किरदार हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त गहराई नहीं दी गई। नयनतारा का गंगा वाला किरदार मजबूत नजर आता है और वह अपने भाई के लिए किसी भी हद तक जाने वाली महिला के रूप में प्रभाव छोड़ती हैं। कियारा आडवाणी नादिया के किरदार में ग्लैमरस होने के साथ कहानी को कुछ भावनात्मक आधार भी देती हैं, लेकिन उनके किरदार को ज्यादा विस्तार मिल सकता था। हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया का स्क्रीन टाइम सीमित है। रुक्मिणी वसंत और संजीदा शेख भी अपनी छोटी भूमिकाओं में नजर आती हैं।
यश हैं फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
अभिनय के मोर्चे पर यश पूरी फिल्म में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। उनका स्वैग, स्क्रीन प्रेजेंस, एक्शन स्टाइल और किरदार का रौब फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है। खास तौर पर उनका लुक, बॉडी लैंग्वेज और एक्शन सीक्वेंस उनके फैंस को पसंद आ सकते हैं। यश ने किरदार के अलग-अलग शेड्स को निभाने में पूरी ऊर्जा दिखाई है। उनका यंगर वर्जन भी प्रभावशाली लगता है।
म्यूजिक और रनटाइम ने किया निराश
फिल्म का संगीत कहानी की भव्यता के मुकाबले उतना असरदार नहीं लगता। 'तबाही' को छोड़ दें तो बाकी गाने कहानी के साथ लंबे समय तक याद नहीं रहते।
फिल्म की लंबाई भी एक बड़ी समस्या है। करीब 3 घंटे 14 मिनट के रनटाइम में कहानी को कई जगह और ज्यादा संक्षिप्त किया जा सकता था। स्लो-मोशन, एक्शन और स्टाइल पर दिया गया अतिरिक्त जोर कई दृश्यों में कहानी की गति को प्रभावित करता है।
कैसी है फिल्म?
अगर आप यश के फैन हैं और बड़े पर्दे पर स्टाइलिश एक्शन, भारी-भरकम विजुअल्स और स्टार पावर देखना पसंद करते हैं, तो 'टॉक्सिक' आपको कुछ शानदार पल दे सकती है। लेकिन अगर आपकी प्राथमिकता मजबूत कहानी, गहरे किरदार और भावनात्मक कनेक्शन है, तो फिल्म कुछ जगह निराश कर सकती है।

