Supreme Court Report: 14 CM से 170 सांसदों तक, किस नेता पर कितने केस? सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट ने चौंकाया
Supreme Court Report: सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक 14 मुख्यमंत्रियों पर गंभीर मामले लंबित हैं। रेवंत रेड्डी 89 मामलों के साथ सबसे आगे हैं।
Supreme Court Report: सुप्रीम कोर्ट में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई को लेकर पेश रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 28 राज्यों में से 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी 89 मामलों के साथ सबसे ऊपर बताए गए हैं।
रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले
रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 आपराधिक मामले बताए गए हैं। उनके बाद सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 29, डीके शिवकुमार और चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ 19-19 मामले बताए गए हैं। केरल के वी.डी. सतीशन के खिलाफ 18 मामले हैं।
वहीं हेमंत सोरेन के खिलाफ पांच, देवेंद्र फडणवीस और सुखविंदर सिंह के खिलाफ चार-चार मामले बताए गए हैं। कई अन्य मुख्यमंत्रियों के खिलाफ भी एक से दो मामले लंबित बताए गए हैं।
विधानसभाओं में भी बड़ी संख्या में गंभीर मामले
रिपोर्ट में राज्यों की विधानसभाओं को लेकर भी चिंता जताई गई है। पश्चिम बंगाल में 292 में से 170 विधायक गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। केरल में करीब 57 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 56 प्रतिशत और तेलंगाना में करीब 49 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ गंभीर मामले बताए गए हैं।
बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा की विधानसभाओं में भी बड़ी संख्या में विधायक ऐसे मामलों का सामना कर रहे हैं।
लोकसभा के 170 सांसदों पर गंभीर मामले
रिपोर्ट के मुताबिक 543 सदस्यीय लोकसभा में 170 सांसद यानी करीब 31 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। तेलंगाना, केरल और बिहार के सांसदों में भी बड़ी संख्या ऐसे मामलों का सामना कर रही है।
राज्यसभा में भी 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले बताए गए हैं, जिनमें 40 गंभीर श्रेणी के हैं।
4,192 मुकदमे अब भी लंबित
जुलाई 2026 तक मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ 4,192 आपराधिक मामले ट्रायल के स्तर पर लंबित बताए गए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश 1,171 मामलों के साथ सबसे आगे है।
सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों और हाईकोर्ट की निगरानी की मांग की गई है। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला लंबित होना दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। अंतिम फैसला अदालत ही करती है।