Nepal Flood: नेपाल बाढ़ में 10 सेकेंड ने कैसे बचाई 900 जानें ? अब तक की क्या है स्थिति, जानिए पूरी खबर
Nepal Flood: नेपाल बाढ़ में एक ओर जहां कुछ सेकेंड में सैकड़ों लोगों की जान चली गई तो वही बाढ़ के दौरान सिर्फ 10 सेकेंड कई लोगों के लिए जिंदगी और मौत का फर्क बन गए। रसुवा कस्टम ऑफिस के अधिकारी करबीर गैरे ने बाढ़ का पानी आते देखा और लोगों को ऊंचाई की ओर भागने को कहा।

Nepal Flood: नेपाल में 26 अगस्त की बाढ़ के दौरान सिर्फ 10 सेकेंड कई लोगों के लिए जिंदगी और मौत का फर्क बन गए। रसुवा कस्टम ऑफिस के अधिकारी करबीर गैरे ने बाढ़ का पानी आते देखा और लोगों को ऊंचाई की ओर भागने को कहा। करीब 10 सेकेंड बाद तेज बहाव ने आसपास के ढांचे बहा दिए। नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की तरफ से भोटेकोशी में बाढ़ की सूचना मिली। इसके 15-16 मिनट बाद रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन में करीब 6 लाख SMS अलर्ट भेजे गए। समय पर चेतावनी मिलने से कई लोग सुरक्षित जगह पहुंच सके।
प्रिंसिपल की सूझबूझ ने ऐसे बचाई 900 बच्चों की जान
हेड टीचर राजेंद्र दवाड़ी के मुताबिक़, उन्हें बाढ़ के ख़तरे को लेकर कुछ ही मिनटों के भीतर अलग-अलग लोगों से चार फ़ोन कॉल आए थे. इन चेतावनियों के बाद उन्होंने बिना देर किए स्कूल ख़ाली कराने का फ़ैसला किया.
राजेंद्र दवाड़ी नुवाकोट स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के हेड टीचर हैं. स्कूल में कुल 1,600 से अधिक स्टूडेंट पढ़ते हैं. बच्चों को ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान की ओर ले जाते समय दवाड़ी ने देखा कि नदी से क़रीब 100 मीटर दूर स्थित स्कूल का हॉस्टल बाढ़ के पानी में डूब रहा था।
अब तक 919 लोगों की मौत
नेपाल-तिब्बत में बाढ़ से 919 लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले नेपाल में 903 मौते हुई हैं, जबकि तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है, 4200 से ज्यादा लोग लापता हैं। है। नेपाली अधिकारियों ने यह ताजा आंकड़ा जारी किया है।
सुरंगों में फंसे लोगों का रेस्क्यू जारी
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। त्रिशूली-3A समेत कई प्रोजेक्ट्स की सुरंगों के मुहाने पर जमा मलबा और कीचड़ हटाकर अंदर पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
रेस्क्यू टीमों में नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। टीमें सुरंगों के अंदर मौजूद लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
बाढ़ के बाद सुरंगों के रास्ते मलबे से बंद हो गए हैं। ऐसे में भारी मशीनों और दूसरे उपकरणों की मदद से रास्ता खोलने का काम किया जा रहा है।
तिब्बत बॉर्डर पर बनी झील का पानी निकला, टला बाढ़ का खतरा
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी बैरियर झील का पानी प्राकृतिक बहाव से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, झील में जमा पानी लगभग पूरी तरह बाहर निकल चुका है। इससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में झील के फटने से अचानक बाढ़ आने का खतरा फिलहाल टल गया है।
यह झील पिछले हफ्ते ग्लेशियर टूटने के बाद चोचेन खोला और चीन की पुरेपु त्सांगपो नदी के संगम के पास बनी थी। इसके पीछे करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था।
नेपाल में भारतीय फोरेंसिक टीम तैनात, DNA जांच में करेगी मदद
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत ने फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें भेजी हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू पहुंचकर काम शुरू कर चुकी है। यह टीम बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान के लिए DNA सैंपल की जांच में नेपाली अधिकारियों की मदद करेगी।
वहीं, भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में नेपाल सेना के सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद की। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स में करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हुए हैं।
