MP Student Union Election: मध्य प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव की हलचल तेज, CM की मंजूरी का इंतजार!
MP Student Union Election: मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में लंबे अरसे बाद छात्रसंघ चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने चुनाव के तौर-तरीकों और रूपरेखा से जुड़ा विस्तृत प्रस्ताव शासन को सौंप दिया है।
MP Student Union Election: मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में लंबे अरसे बाद छात्रसंघ चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने चुनाव के तौर-तरीकों और रूपरेखा से जुड़ा विस्तृत प्रस्ताव शासन को सौंप दिया है। हालांकि, मतदान प्रत्यक्ष प्रणाली (सीधी वोटिंग) से होगा या अप्रत्यक्ष (मेरिट/प्रतिनिधि आधारित), इस पर असमंजस बरकरार है। पूरा मामला अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अंतिम स्वीकृति पर टिका हुआ है।
HC का सितंबर में चुनाव कराने के निर्देश
उच्च शिक्षा विभाग के चालू शैक्षणिक कैलेंडर में सितंबर माह में छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान शामिल है। इसी आधार पर जबलपुर हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को तय समय-सीमा यानी सितंबर में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालती निर्देश के बाद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक कर तैयारियों और संभावित विकल्पों की समीक्षा की है।
NSUI का शासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
चुनावी तारीखों के ऐलान में हो रही देरी को लेकर छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने शासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। NSUI के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे का स्पष्ट कहना है कि यदि तय समय में चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं हुआ, तो संगठन अदालत की अवमानना का मामला उठाएगा और पूरे प्रदेश में उग्र प्रदर्शन करेगा।
प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की मांग
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी कैंपस में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने की पैरवी कर रही है। परिषद ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ही कराए जाएं। ABVP मीडिया विभाग के शिवम जाट के अनुसार, सीधी वोटिंग व्यवस्था से ही आम छात्र-छात्राओं को अपना प्रतिनिधि चुनने का वास्तविक अधिकार मिलता है।
तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर मंथन जारी
चुनाव का सही प्रारूप तय करने के लिए सरकार ने तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर ही उच्च शिक्षा विभाग ने शासन स्तर पर मसौदा तैयार किया है। प्रत्यक्ष बनाम अप्रत्यक्ष प्रणाली के पेंच के बीच अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री सचिवालय के अंतिम आदेश पर टिकी हैं।
2017 से ठप है छात्र राजनीति की प्रक्रिया
मध्य प्रदेश में साल 2017 के बाद से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों के चलते बीते वर्षों में यह प्रक्रिया टलती रही। अब अदालती आदेश और शैक्षणिक कैलेंडर के दबाव के बाद एक बार फिर परिसरों में चुनावी माहौल बनता दिख रहा है, लेकिन अंतिम मुहर सरकार के निर्णय के बाद ही लगेगी।
