Railway Rules: लोअर बर्थ के नीचे सामान रखने का हक किसका? रेलवे का नियम जानकर खत्म होगा सीट को लेकर विवाद
Railway Rules: लोअर बर्थ के नीचे सामान रखने की जगह सिर्फ सीट वाले यात्री की नहीं होती। मिडिल और अपर बर्थ यात्री भी तय जगह में सामान रख सकते हैं।

Railway Rules: ट्रेन में सफर के दौरान लोअर बर्थ के नीचे सामान रखने को लेकर यात्रियों के बीच अक्सर बहस हो जाती है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि जिस यात्री की लोअर बर्थ है, उसके नीचे की पूरी जगह भी उसी की है। लेकिन रेलवे के नियमों के मुताबिक ऐसा नहीं है। लोअर बर्थ के नीचे उपलब्ध जगह पर उसी कोच या केबिन में सफर कर रहे दूसरे यात्रियों का भी सामान रखा जा सकता है।
लोअर बर्थ के नीचे सिर्फ सीट वाले का अधिकार नहीं
किसी यात्री के टिकट पर लोअर बर्थ जरूर निर्धारित होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सीट के नीचे की जगह पर उसका अकेले अधिकार हो गया। मिडिल और अपर बर्थ पर यात्रा करने वाले यात्री भी लोअर बर्थ के नीचे उपलब्ध निर्धारित जगह में अपना सामान रख सकते हैं। इसलिए इस जगह को लेकर दूसरे यात्रियों को रोकना सही नहीं है।
मिडिल और अपर बर्थ वाले भी रख सकते हैं बैग
रेल यात्रा के दौरान लोअर बर्थ वाले यात्री अपनी सीट के नीचे सामान रख सकते हैं। इसी तरह मिडिल बर्थ और अपर बर्थ के यात्रियों को भी लोअर बर्थ के नीचे उपलब्ध जगह का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। हालांकि सभी यात्रियों को ध्यान रखना चाहिए कि सामान इस तरह रखा जाए, जिससे किसी दूसरे यात्री को परेशानी न हो और आने-जाने की जगह बाधित न हो।
सामान ले जाने की भी है तय सीमा
रेलवे ने अलग-अलग श्रेणी में सामान ले जाने के लिए वजन की सीमा भी तय की है। स्लीपर क्लास में 40 किलो तक सामान बिना अतिरिक्त शुल्क ले जाने की सुविधा है। AC 3-टियर और AC 2-टियर में यह सीमा करीब 40 से 50 किलो तक बताई गई है, जबकि AC फर्स्ट क्लास में 70 किलो तक सामान ले जाने की अनुमति है। इससे ज्यादा सामान होने पर अतिरिक्त शुल्क या अन्य नियम लागू हो सकते हैं।
विवाद हो तो खुद न करें बहस
सामान रखने को लेकर विवाद होने पर यात्रियों को खुद झगड़ा करने के बजाय ट्रेन में मौजूद TTE की मदद लेनी चाहिए। यात्री RailMadad के जरिए भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा रेलवे की 139 हेल्पलाइन पर कॉल करके कोच और सीट से जुड़ी समस्या की जानकारी दी जा सकती है।
