Rasik Chandra Mandal Case: 105 साल के कैदी को सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी आजादी? जानें 1988 के केस की कहानी
सुप्रीम कोर्ट ने 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को स्थायी रिहाई दी। 1988 के हत्या मामले में उम्रकैद काट रहे रसिक अब परिवार के साथ बाकी जिंदगी बिताएंगे।
Rasik Chandra Mandal Case: पश्चिम बंगाल के 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब तीन दशक पुराने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रसिक मंडल को अब स्थायी रूप से जेल से रिहा कर दिया गया है। शीर्ष अदालत ने उनकी उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें परिवार के साथ रहने का मौका मिलना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उठा सवाल
शुक्रवार को जब रसिक मंडल का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया तो बेंच ने उनकी उम्र को लेकर सवाल किया। जजों ने केस की जानकारी देखने के बाद पूछा कि क्या 105 वर्षीय रसिक मंडल अभी जीवित हैं। अदालत ने कहा कि इतनी अधिक उम्र में किसी व्यक्ति को बार-बार पैरोल देने के बजाय स्थायी रूप से रिहा करने पर विचार किया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने भी अदालत के इस विचार पर सहमति जताई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने रसिक मंडल की अर्जी स्वीकार कर ली और उन्हें स्थायी रूप से जेल से रिहा करने का आदेश दिया।
68 साल की उम्र में गिरफ्तार हुए थे रसिक
रसिक चंद्र मंडल का जन्म 1920 में पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। 9 नवंबर 1988 को मालदा के मानिकचक पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज हुआ था। उस समय रसिक मंडल करीब 68 साल के थे और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
कई साल चली कानूनी लड़ाई
इस मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। दिसंबर 1994 में निचली अदालत ने रसिक मंडल को हत्या के मामले में दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। करीब 24 साल बाद 2018 में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद रसिक मंडल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन 2019 में शीर्ष अदालत ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इस तरह सजा के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई से राहत नहीं मिली।
100 साल की उम्र में बेटे ने लगाई गुहार
समय के साथ रसिक मंडल की उम्र काफी बढ़ गई और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी सामने आने लगीं। उन्हें जेल से बालुरघाट के एक सुधार गृह में स्थानांतरित किया गया था। जब उनकी उम्र करीब 100 साल हुई, तब उनके बेटे ने 2020 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बेटे ने अदालत से पिता की बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें रिहा करने की मांग की थी। इस याचिका के बाद मामला एक बार फिर अदालत के सामने आया।
2024 में मिली थी अंतरिम पैरोल
सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर 29 नवंबर 2024 को रसिक मंडल को अंतरिम पैरोल दी थी। इसके बाद उनकी उम्र और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए स्थायी रिहाई की मांग जारी रही। अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत को स्थायी करते हुए उन्हें पूरी तरह जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत के फैसले के बाद 105 वर्षीय रसिक मंडल अपनी जिंदगी के बाकी दिन परिवार के साथ बिता सकेंगे।
