Bhopal News: भोपाल में अब क्या फिर सील होंगी दुकानें? जानिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से क्यों मची हलचल!
Bhopal News: रिहायशी इलाकों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए सरकार की जांच समिति पर रोक लगा दी और पांच सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
Bhopal News: भोपाल में रिहायशी क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि मामले की निगरानी वह स्वयं कर रहा है। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
सरकार की जांच समिति पर लगी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि जब मामला पहले से उसकी निगरानी में है, तब समानांतर जांच प्रक्रिया नहीं चलाई जा सकती। अदालत ने इस दौरान राज्य सरकार के पक्ष पर भी नाराजगी जताई।ये भी पढ़ें - Bhopal News: पुराने भोपाल में 7 अगस्त को बाजार बंद का ऐलान, मोती मस्जिद बैरिकेडिंग को लेकर बढ़ा विरोध
हाईकोर्ट की राहत भी निरस्त
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दुकान संचालकों को हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत को भी निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश सर्वोपरि रहेंगे और कार्रवाई में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नगर निगम की रिपोर्ट पर सवाल
सुनवाई के दौरान नगर निगम ने अदालत में कहा कि वह कार्रवाई करना चाहता है, लेकिन उसके हाथ बंधे हुए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निगम की रिपोर्ट पर सवाल उठाए। कोर्ट में करीब 100 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग का दावा किया गया था, जबकि वास्तविकता में केवल दो प्रतिष्ठानों को ही सील किए जाने की बात सामने आई।
5 सप्ताह में मांगी विस्तृत रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को पांच सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि अवैध निर्माण और रिहायशी क्षेत्रों में नियमों के विरुद्ध चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
नगर निगम ने आदेश का इंतजार बताया
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का लिखित आदेश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि समिति के निर्णय के आधार पर पहले लगाए गए ताले खोले गए थे और अब पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार समीक्षा की जाएगी।
