Lucknow Kanpur Expressway : पंखा से सुख रहा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
Lucknow Kanpur Expressway : 20 दिन के भीतर लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे के कई हिस्से बार- बार धंसने के बाद अब एक्सप्रेस वे को पंखे से सुखाने का एक नया वीडियो वायरल हो रहा है।
Lucknow Kanpur Expressway : उत्तर प्रदेश। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। उद्घाटन के केवल 20 दिन के भीतर सड़क के कई हिस्सों में बार-बार धंसाव और मरम्मत की घटनाएं सामने आने के बाद अब एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मरम्मत किए गए हिस्से को बड़े पंखों की मदद से सुखाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, आम लोगों के बीच भी सड़क की मजबूती और यात्रा की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल वीडियो साझा करते हुए राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कुछ ही दिन पहले हुआ हो, उसकी इतनी जल्दी मरम्मत होना चिंता का विषय है। उन्होंने पंखों से सड़क सुखाने की प्रक्रिया पर भी तंज कसते हुए इसे विकास का नया मॉडल बताया।
अखिलेश यादव ने कहा कि जब कोई एक्सप्रेसवे दो से तीन सप्ताह के भीतर ही कई बार मरम्मत की मांग करने लगे, तब उस पर तेज रफ्तार से सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता होना स्वाभाविक है। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए।
उद्घाटन के बाद लगातार सामने आईं समस्याएं
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर करीब 4,200 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
इसके शुरू होने के बाद एक तरफ की यात्रा के लिए 275 रुपये टोल निर्धारित किया गया था। हालांकि, उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क के कई हिस्सों में धंसाव और सतह खिसकने की शिकायतें मिलने लगीं।
अधिकारियों के अनुसार, करीब 20 दिनों के भीतर पांच अलग-अलग स्थानों पर सड़क की मरम्मत करनी पड़ी। इससे परियोजना की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
मौके पर क्या मिले हालात
मौके पर पहुंचे मीडिया दल ने पाया कि प्रभावित हिस्से में मरम्मत का काम लगातार जारी है। सड़क की एक लेन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके कारण दोनों दिशाओं का ट्रैफिक एक ही कैरिजवे से संचालित किया जा रहा है।
कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और भारी मशीनों की सहायता से सड़क को दोबारा तैयार किया जा रहा है। इस व्यवस्था के चलते वाहन चालकों को धीमी गति से यात्रा करनी पड़ रही है। यात्रियों को अतिरिक्त समय भी लग रहा है, जिससे असुविधा बढ़ी है।
ट्रैफिक डायवर्जन और यात्रियों की परेशानी
यात्रियों का कहना है कि टोल प्लाजा से प्रवेश करने के बाद उन्हें आगे जाकर यू-टर्न लेना पड़ रहा है। कई किलोमीटर तक वाहनों को विपरीत दिशा वाली लेन से निकाला जा रहा है। कुछ लोगों ने शिकायत की कि टोल प्लाजा पर उन्हें पहले से यह जानकारी नहीं दी गई कि आगे सड़क प्रभावित है और ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है।
इस कारण कई यात्रियों को बीच रास्ते में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, बाद में NHAI ने मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोकने का फैसला किया ताकि लोगों को कुछ राहत मिल सके।
NHAI ने की सख्त कार्रवाई
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण एजेंसी PNC इंफोटेक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्राधिकरण ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की सिफारिश भेजी है। परियोजना निदेशक को पद से हटाया गया है और पूर्व परियोजना निदेशक को चार्जशीट जारी की गई है।
इसके अलावा परियोजना से जुड़े कुछ इंजीनियरों और अधिकारियों पर दो वर्षों तक NHAI तथा मंत्रालय की परियोजनाओं में काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह कार्रवाई जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बार-बार सड़क धंसने की वजह क्या है
NHAI अधिकारियों के अनुसार, लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी तक पानी पहुंच गया। इससे मिट्टी की मजबूती प्रभावित हुई और कुछ हिस्सों में स्लिपेज यानी धंसाव की स्थिति बन गई। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अंतिम तकनीकी कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मामले की विस्तृत जांच के लिए IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही पूरे एक्सप्रेसवे की सतह की जांच लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से भी कराई जा रही है ताकि किसी भी संभावित तकनीकी कमी का पता लगाया जा सके।
मरम्मत का पूरा खर्च कंपनी उठाएगी
NHAI ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित हिस्से की मरम्मत पर आने वाला लगभग 3 करोड़ रुपये का खर्च निर्माण कंपनी ही वहन करेगी। इसके अलावा निर्माण और निगरानी में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसी की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
यात्रियों को राहत देते हुए प्राधिकरण ने मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली बंद रखने का निर्णय लिया है। इस दौरान होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी निर्माण कंपनी से ही की जाएगी। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे धंसाव के वास्तविक कारण और आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।