Padma Shri Awards 2026 : नई दिल्ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में इस बार देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया। अमेरिका के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. दत्तात्रेयुडु नोरी को पद्म भूषण, प्रोफेसर प्रतीक शर्मा को पद्म श्री, रूस की ल्यूडमिला खोखलोवा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म श्री तथा जॉर्जिया के व्लादिमीर मेस्तविरीश्विली को मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया गया। वहीं पश्चिम बंगाल के प्रोफेसर महेंद्र नाथ रॉय को विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पद्म श्री प्रदान किया गया। इन सभी सम्मानित हस्तियों के बीच सबसे अधिक चर्चा 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू की रही, जिन्हें स्वच्छता के क्षेत्र में उनके अनूठे योगदान के लिए पद्म श्री से नवाजा गया।
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सड़क पर सफाई करते-करते बने देशभर में मिसाल
चंडीगढ़ के सेक्टर-49 निवासी सरदार इंदरजीत सिंह सिद्धू को शहर में लोग ‘झाड़ू योद्धा’ के नाम से जानते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने समाज सेवा को अपना मिशन बना लिया। सुबह की सैर के दौरान जब उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर फैली गंदगी देखी तो खुद झाड़ू उठाकर सफाई शुरू कर दी।
धीरे-धीरे उनका यह अभियान लोगों के लिए प्रेरणा बन गया। उनकी सफाई करते हुए कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र सरकार को उनके नाम की सिफारिश भेजी थी।
चोटिल होने के बावजूद नहीं छोड़ा सफाई का संकल्प
कुछ दिन पहले एक वाहन की टक्कर से उनके पैर में चोट लग गई थी। इसके बावजूद उन्होंने सफाई का काम नहीं छोड़ा। चलने में दिक्कत होने के बावजूद वह छड़ी के सहारे रोज अपने इलाके में सफाई करते हैं। उनका कहना है कि स्वच्छता सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान
दिल्ली में आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। पुरस्कार ग्रहण करने के बाद सिद्धू और उनके परिवार ने खुशी जताई और इसे समाज सेवा के प्रति लोगों के सम्मान का प्रतीक बताया।
पुलिस सेवा में भी रहा शानदार करियर
इंदरजीत सिंह सिद्धू ने वर्ष 1963 में पंजाब पुलिस में निरीक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। वर्ष 1981 में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नति मिली। अपने लंबे कार्यकाल में उन्होंने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, नई दिल्ली और कोलकाता में सेवाएं दीं।
वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने सांबा सेक्टर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 1991 में सराहनीय सेवा पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 1996 में वह पंजाब पुलिस में डीआईजी पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
पद्म पुरस्कारों में विदेशी नागरिकों को भी मिला सम्मान
इस वर्ष पद्म पुरस्कार पाने वालों की सूची में कई विदेशी नागरिक भी शामिल रहे। अमेरिका के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. दत्तात्रेयुडु नोरी को चिकित्सा क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वहीं प्रोफेसर प्रतीक शर्मा को चिकित्सा क्षेत्र में पद्म श्री मिला।
रूस की ल्यूडमिला खोखलोवा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म श्री से सम्मानित किया गया, जबकि जॉर्जिया के व्लादिमीर मेस्तविरीश्विली को खेल क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म श्री दिया गया। पश्चिम बंगाल के प्रोफेसर महेंद्र नाथ रॉय को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किया गया।
संदेश साफ है: उम्र नहीं, इरादे मायने रखते हैं
88 साल की उम्र में भी इंदरजीत सिंह सिद्धू का हर सुबह झाड़ू लेकर निकलना इस बात का उदाहरण है कि समाज में बदलाव लाने के लिए किसी पद या अधिकार की नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। पद्म श्री सम्मान ने उनके इसी संदेश को राष्ट्रीय पहचान दिला दी है।