Datia Historical Photo : दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में भारतीय इतिहास से जुड़ा एक दुर्लभ और बेहद महत्वपूर्ण फोटो एलबम सामने आया है। इस फोटो फ्रेम में ब्रिटिश शासनकाल की महारानी विक्टोरिया के साथ भारत की कई प्रमुख रियासतों के शासकों की तस्वीरें एक साथ दिखाई देती हैं। इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यह दुर्लभ फोटो फ्रेम वर्ष 1860 से 1875 के बीच का हो सकता है। इस खोज ने इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, क्योंकि इसमें उस दौर के कई प्रमुख भारतीय राजवंशों की दुर्लभ तस्वीरें संरक्षित हैं।
महारानी विक्टोरिया के साथ 12 राजाओं की तस्वीरें
इस फोटो फ्रेम के केंद्र में महारानी विक्टोरिया की तस्वीर है, जबकि उनके चारों ओर भारत की विभिन्न रियासतों के 12 शासकों के चित्र लगाए गए हैं। फ्रेम पर “पूना फोटोग्राफिक कंपनी” का नाम भी दर्ज है।
पुरातत्वविद डॉ. वसीम खान के अनुसार, संभव है कि किसी विशेष समारोह या राजकीय कार्यक्रम के दौरान ये भारतीय शासक ब्रिटेन गए हों और उसी अवसर पर यह स्मृति चित्र तैयार किया गया हो।
तस्वीर में होल्कर, सिंधिया, हैदराबाद और अन्य महत्वपूर्ण रियासतों के शासकों को स्थान दिया गया है, जो उस समय ब्रिटिश शासन के प्रभावशाली सहयोगी माने जाते थे।

कई प्रसिद्ध राजवंशों के शासकों की पहचान
इस दुर्लभ एलबम में हैदराबाद के निजाम मीर महबूब अली खान, बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़, मैसूर के महाराजा चामराजेंद्र वाडियार, इंदौर के शिवाजीराव होल्कर, चरखारी के महाराजा मलखान सिंह, त्रावणकोर के थिरुनल राम वर्मा, ग्वालियर के जियाजी राव सिंधिया और जयपुर के सवाई माधो सिंह द्वितीय सहित कई ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की तस्वीरें शामिल हैं। विशेषज्ञ अब तक 12 में से 9 शासकों की पहचान करने में सफल रहे हैं, जबकि तीन तस्वीरों के नाम क्षतिग्रस्त होने के कारण उनकी पहचान अभी बाकी है।

दतिया तक पहुंचने की कहानी भी रोचक
इस दुर्लभ फोटो फ्रेम की कहानी भी काफी दिलचस्प है। जानकारी के अनुसार दतिया के एक फोटो फ्रेमिंग करने वाले दुकानदार को यह तस्वीर दशकों पहले फ्रेमिंग के लिए दी गई थी। हालांकि तस्वीर लेने वाला व्यक्ति कभी वापस नहीं लौटा।
बाद में पुराने सिक्कों और ऐतिहासिक वस्तुओं के संग्रहकर्ता राधावल्लभ मिश्रा की नजर इस फोटो फ्रेम पर पड़ी। उन्होंने इसकी ऐतिहासिक महत्ता को समझते हुए इसे अपने पास सुरक्षित रखा। राधावल्लभ मिश्रा के पूर्वज दतिया रियासत में राजपंडित के पद पर कार्यरत रहे थे।
शोध और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण खोज
यह दुर्लभ तस्वीर ज्ञान भारतम् अभियान के तहत किए गए सर्वेक्षण के दौरान सामने आई है। इतिहासकारों का मानना है कि यह फोटो फ्रेम ब्रिटिश काल और भारतीय रियासतों के आपसी संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
साथ ही यह भारतीय राजवंशों के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और उस दौर की फोटोग्राफी तकनीक पर शोध के लिए भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकता है।






