Student Suicides : नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर जारी विवाद के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पेपर लीक और री-एग्जाम की चर्चाओं के बीच कई छात्रों के आत्महत्या करने की खबरें सामने आई हैं। हाल ही में तमिलनाडु की छात्रा अनुकीर्तना की मौत के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। इससे पहले देहरादून और दिल्ली में भी NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या के मामले सामने आए थे। इन घटनाओं ने अभिभावकों, शिक्षाविदों और राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।
देहरादून की रिया थापा की मौत ने सबको झकझोर दिया
उत्तराखंड के देहरादून में 23 वर्षीय रिया कुमारी थापा ने आत्महत्या कर ली। रिया कारगिल युद्ध में सेवा दे चुके एक सैनिक की बेटी थीं। वह पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं और 12वीं कक्षा में टॉपर रह चुकी थीं। बताया जा रहा है कि वह NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थीं और पिछले प्रयास में सफलता नहीं मिलने के कारण मानसिक तनाव में थीं।
रिया ने अपने पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उन्होंने अपने माता-पिता के प्रति प्यार व्यक्त करते हुए लिखा कि उनकी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया।
दिल्ली और तमिलनाडु में भी सामने आए दर्दनाक मामले
दिल्ली के पालम क्षेत्र में रहने वाली 17 वर्षीय NEET अभ्यर्थी रेनू ने 13 जून को अपने घर में आत्महत्या कर ली। परिवार के अनुसार वह लंबे समय से अवसाद और परीक्षा के दबाव से जूझ रही थीं। रेनू ने अपने सुसाइड नोट में माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं।
वहीं तमिलनाडु की छात्रा अनुकीर्तना ने भी कथित तौर पर NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद से निराश होकर आत्महत्या कर ली। इन घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली और छात्रों पर बढ़ते दबाव को लेकर बहस तेज कर दी है।
10 छात्रों की मौत का दावा
NEET परीक्षा विवाद के बीच विभिन्न रिपोर्टों और राजनीतिक बयानों में अब तक 10 छात्रों की मौत का उल्लेख किया गया है। इनमें ऋतिक मिश्रा, अंशिका पांडे, प्रदीप मेघवाल, सिद्धार्थ हेगड़े, आकांक्षा चतुर्वेदी, भाग्यश्री, रेणु मीणा, रिया कुमारी थापा, उमेश माली और अनुकीर्तना के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि इन सभी मामलों में आत्महत्या के कारणों को लेकर अलग-अलग जांच और तथ्य सामने आ सकते हैं। फिर भी इन घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर कहा कि डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले कई छात्र परीक्षा विवाद और मानसिक दबाव के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और छात्रों पर बढ़ते दबाव को गंभीरता से नहीं लिया गया। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और छात्रों के लिए बेहतर मानसिक सहायता तंत्र विकसित करने की मांग की है।
CUET परीक्षा प्रारूप पर भी संसदीय समिति की चिंता
इस बीच दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने CUET परीक्षा के बहुविकल्पीय प्रश्न आधारित प्रारूप पर चिंता व्यक्त की है। समिति का मानना है कि मौजूदा प्रारूप छात्रों की स्वतंत्र सोच, विश्लेषण क्षमता और व्यक्तिपरक समझ का पूर्ण मूल्यांकन नहीं कर पाता।
समिति ने परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करने और आवश्यक सुधार लागू करने की सिफारिश की है ताकि छात्रों की वास्तविक योग्यता का बेहतर आकलन किया जा सके।