US-Iran War Ends : वांशिगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य टकराव को समाप्त करने के उद्देश्य से एक अंतरिम शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं। इस समझौते को दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने डिजिटल माध्यम से इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। घोषणा के तुरंत बाद यह समझौता प्रभावी हो गया। समझौते के लागू होने के साथ ही युद्ध समाप्त करने, समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने और परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में काम शुरू हो गया है।
वर्साय पैलेस में हुआ ऐतिहासिक समझौता
यह समझौता फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस से जुड़ा हुआ है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। यह वही स्थान है जहां 1919 में प्रथम विश्व युद्ध समाप्त करने वाली वर्साय संधि पर हस्ताक्षर हुए थे।
इतिहासकारों का मानना है कि उस संधि ने आगे चलकर यूरोप की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया था। ऐसे में उसी स्थान पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का होना प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रम्प ने बताया समझौते को बड़ी सफलता
समझौते के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि उनका प्रमुख लक्ष्य युद्ध समाप्त करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। उनके अनुसार यह सभी उद्देश्य इस समझौते के जरिए हासिल कर लिए गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में ईरान समझौते की शर्तों का उल्लंघन करता है तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा, वैश्विक व्यापार को राहत
समझौते के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। समझौते के अनुसार अगले 60 दिनों तक इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है और तेल आपूर्ति की स्थिति सामान्य हो सकती है।
ईरान पर लगे प्रतिबंधों में मिल सकती है राहत
समझौते के तहत अमेरिका ने संकेत दिया है कि अंतिम और व्यापक समझौता होने के बाद ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा सकता है। इसके अलावा ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को भी जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा और विदेशी निवेश का रास्ता भी खुल सकता है।
परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान
इस समझौते में ईरान ने दोबारा आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इसके साथ ही संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था स्थापित करने पर भी सहमति बनी है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
60 दिनों में अंतिम समझौते का लक्ष्य
अंतरिम समझौते में दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर एक व्यापक और स्थायी समझौते पर पहुंचने का लक्ष्य तय किया है। इस दौरान दोनों पक्ष वर्तमान स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समयसीमा चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यदि सफल रहती है तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।
चीन ने किया स्वागत, पालन पर दिया जोर
चीन ने इस समझौते का स्वागत किया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि सभी पक्षों को युद्धविराम और समझौते की शर्तों का पूरी तरह सम्मान करना चाहिए। चीन ने क्षेत्र में मानवीय सहायता जारी रखने की भी घोषणा की है। इससे यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समझौते को सकारात्मक नजरिए से देख रहा है।
300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड पर चर्चा
समझौते में ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर तक की संभावित वित्तीय व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह धन सीधे अमेरिका नहीं देगा। संभावना जताई जा रही है कि खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की भागीदारी से यह फंड तैयार किया जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी से बढ़ सकती है ताकत
समझौते के अंतिम चरण में इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। यदि ऐसा होता है तो समझौते को अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता मिलेगी। इससे इसकी विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे तथा अन्य देशों को भी इसके प्रावधानों का सम्मान करना होगा।