Rahul Gandhi Defamation Case : जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई हुई। यह मामला केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दायर मानहानि प्रकरण से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट की ऑर्डर शीट और संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है।
भोपाल कोर्ट के समन को दी गई है चुनौती
राहुल गांधी ने भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी ओर से दायर याचिका में समन आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रिकॉर्ड पेश करने के लिए राहुल गांधी के वकीलों को समय प्रदान किया।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद उस कथित बयान से जुड़ा है जिसमें राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम कथित तौर पर “पनामा पेपर्स” प्रकरण से जोड़कर बयान दिया था।
इसी बयान को आधार बनाकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। मामले में भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था।
23 जून को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित की है। तब तक संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद कोर्ट याचिका में उठाए गए कानूनी बिंदुओं पर आगे विचार करेगा।
क्या है पनामा पेपर्स लीक?
पनामा पेपर्स लीक दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय खुलासों में से एक माना जाता है। वर्ष 2016 में मध्य अमेरिका के देश पनामा की लॉ फर्म मोसैक फोंसेका (Mossack Fonseca) के करीब 1.15 करोड़ गोपनीय दस्तावेज लीक हो गए थे। इन दस्तावेजों में दुनिया भर के नेताओं, उद्योगपतियों, खिलाड़ियों और अन्य प्रभावशाली लोगों के विदेशी निवेश और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी सामने आई थी।
शेल कंपनियों और टैक्स बचाने का खुलासा
लीक दस्तावेजों से पता चला था कि कई प्रभावशाली लोगों ने अपनी संपत्ति छिपाने और कर (टैक्स) बचाने के लिए पनामा समेत कई देशों में शेल कंपनियां बनाई थीं। ऐसे देशों को “टैक्स हेवन” कहा जाता है, क्योंकि वहां निवेश पर बहुत कम या शून्य कर लगता है और निवेशकों की पहचान गोपनीय रखी जाती है। आरोप यह भी लगे थे कि कुछ लोगों ने इन कंपनियों के माध्यम से काले धन को सफेद करने की कोशिश की।
भारत के भी कई नाम आए थे सामने
पनामा पेपर्स की सूची में भारत के करीब 500 लोगों के नाम सामने आए थे। इनमें कुछ कारोबारी, फिल्म जगत से जुड़े लोग और अन्य प्रभावशाली हस्तियां शामिल थीं। हालांकि किसी का नाम सूची में होना अपने आप में अपराध साबित नहीं माना जाता और मामलों की जांच अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की गई थी।
दुनियाभर की राजनीति पर पड़ा असर
इस खुलासे का असर कई देशों की राजनीति पर भी पड़ा था। नवाज शरीफ (Nawaz Sharif) के परिवार का नाम सामने आने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। वहीं सिगमंडुर डेविड गुनलॉगसन ने भी भारी विरोध के बाद इस्तीफा दे दिया था। भारत समेत कई देशों ने इसके बाद काले धन और कर चोरी के मामलों पर निगरानी बढ़ाई थी।
कैसे हुआ था खुलासा?
एक अज्ञात व्हिसलब्लोअर ने ये दस्तावेज जर्मनी के एक अखबार को उपलब्ध कराए थे। इसके बाद इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स और दुनिया भर के पत्रकारों ने कई महीनों तक जांच-पड़ताल की। आखिरकार 3 अप्रैल 2016 को यह खुलासा सार्वजनिक किया गया, जिसने वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बड़ी हलचल मचा दी।