Maharashtra Politics : नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर संभावित फूट की चर्चाएं अब खुलकर सामने आने लगी हैं। नई दिल्ली में आयोजित पार्टी की एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा के नौ सांसदों में से केवल तीन सांसदों की मौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और बल दे दिया है। इस घटनाक्रम के बाद माना जा रहा है कि पार्टी के कुछ सांसद जल्द कोई बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं।
केवल तीन सांसद पहुंचे प्रेस कॉन्फ्रेंस में
बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, राजाभाऊ वाजे और अनिल देसाई शामिल हुए। वहीं पार्टी के अन्य छह सांसद कार्यक्रम से दूर रहे। उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति शिवसेना (यूबीटी) के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि अनुपस्थित सांसदों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
RE- NEET 2026 को लेकर MP पुलिस अलर्ट, 38 साइबर कमांडो रखेंगे नजर; DGP ने दिए सख्त निर्देश
संजय राउत ने जताई नाराजगी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पार्टी के प्रति निष्ठा और नेतृत्व के प्रति विश्वास की बात कही। उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक का पद स्थायी नहीं होता, लेकिन पार्टी और उसके सिद्धांत हमेशा महत्वपूर्ण रहते हैं।
उन्होंने बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने सभी नेताओं को पहचान और सम्मान दिया है। इस दौरान राउत ने संभावित रूप से पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर नाराजगी भी व्यक्त की।
उद्धव ठाकरे के सामने नई राजनीतिक चुनौती
लोकसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के पार्टी से दूरी बनाने की चर्चाओं ने उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यदि आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होता है, तो इसका असर राज्य की राजनीति और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है।
आगे की रणनीति पर टिकी निगाहें
फिलहाल पार्टी नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में सांसदों की ओर से आने वाले बयान और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पूरे मामले की दिशा तय करेगी। ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।