Iran-US Peace Deal : वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रम्प के अनुसार दोनों देशों के बीच समझौता लगभग पूरा हो चुका है और इस पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। इस दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और दुनिया भर की नजरें इस संभावित समझौते पर टिक गई हैं।
डिजिटल हस्ताक्षर की खबरों ने बढ़ाई चर्चा
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रम्प, जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पहले ही डिजिटल रूप से समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। हालांकि अभी तक समझौते का पूरा मसौदा सार्वजनिक नहीं किया गया है। ट्रम्प ने कहा है कि आधिकारिक दस्तावेज शुक्रवार के बाद जारी किया जाएगा। इसी वजह से समझौते की शर्तों को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है।
14 बिंदुओं वाले मसौदे की चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाला एक प्रारंभिक मसौदा तैयार किया गया है। इसमें युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत, समुद्री व्यापार की बहाली और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों को शामिल किया गया है। मसौदे के अनुसार ईरान, लेबनान और अन्य मोर्चों पर संघर्ष रोकने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। वहीं अमेरिका और इजराइल की ओर से नए युद्ध की शुरुआत नहीं करने की गारंटी देने की भी बात कही गई है।
आर्थिक राहत और प्रतिबंधों में ढील पर फोकस
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ईरान को आर्थिक सहायता के रूप में बड़ा पैकेज मिल सकता है। इसके अलावा ईरान के फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड को चरणबद्ध तरीके से जारी करने की योजना भी चर्चा में है। होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा व्यापार के लिए खोलने और समुद्री व्यापार पर लगी पाबंदियों को हटाने का प्रस्ताव भी मसौदे का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि इन सभी बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
ट्रम्प ने शर्तों के पालन को बताया जरूरी
डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट कहा है कि ईरान को किसी भी प्रकार की राहत तभी मिलेगी जब वह समझौते की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन करेगा। अमेरिका ने फिलहाल तत्काल आर्थिक राहत देने से इनकार किया है। ट्रम्प का कहना है कि समझौते की सफलता पूरी तरह इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
इजराइल ने समझौते से बनाई दूरी
इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने कहा है कि यह ट्रम्प की डील है और इजराइल इससे बंधा हुआ नहीं है। वहीं रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी स्पष्ट किया कि दक्षिणी लेबनान से सेना नहीं हटाई जाएगी। इससे संकेत मिलते हैं कि समझौते को लेकर सभी पक्षों में एक जैसी सहमति नहीं है।
फ्रांस और ईरान की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इस समझौते को ईरान की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। उनका कहना है कि बातचीत में ईरान मजबूत स्थिति में रहा है।
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लेबनान मुद्दे पर नेतन्याहू को ट्रम्प की सलाह
ट्रम्प ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान के मुद्दे पर अधिक जिम्मेदार रवैया अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए पूरी इमारत को गिराना उचित नहीं है।
ट्रम्प का मानना है कि इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ता तनाव अमेरिका-ईरान समझौते की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसके बावजूद उन्होंने विश्वास जताया कि समझौता कायम रह सकता है।
कई देशों ने किया समझौते का स्वागत
यूएई, कुवैत, स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान सहित कई देशों ने इस संभावित समझौते का स्वागत किया है। इन देशों का मानना है कि यह कदम मध्य पूर्व में शांति, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा दे सकता है। यदि यह समझौता सफल रहता है तो क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीद भी बढ़ सकती है।