MP New Labour Law : भोपाल। मध्यप्रदेश में श्रम कानूनों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश सरकार 6 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर उनकी जगह एक सिंगल एक्ट लाने की तैयारी में है। इसका मकसद श्रम कानूनों को आसान बनाना, कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं देना और कारोबार के लिए प्रक्रियाओं को सरल करना है। नए एक्ट का ड्राफ्ट लगभग तैयार बताया जा रहा है।
सिंगल एक्ट पर तेजी से चल रहा काम
नए श्रम कानून का मसौदा तैयार करने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल की अध्यक्षता में गठित टीम अब तक कई दौर की बैठकें कर चुकी है। बताया जा रहा है कि प्रस्ताव का प्रारूप लगभग तैयार हो चुका है।
केंद्र की तर्ज पर होगा बदलाव
केंद्र सरकार की ओर से श्रम कानूनों को नए लेबर कोड में समाहित किए जाने के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार भी उसी दिशा में आगे बढ़ रही है। उद्देश्य अलग-अलग कानूनों को एक ही ढांचे में लाकर व्यवस्था को आसान बनाना है।
कर्मचारियों को क्या होंगे फायदे?
प्रस्तावित एक्ट में वेतन, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक संबंधों से जुड़े प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। कर्मचारियों को काम के घंटे, छुट्टियों और अन्य सुविधाओं को लेकर अधिक स्पष्ट व्यवस्था मिलने की संभावना है।
सप्ताहिक छुट्टी चुन सकेगा कर्मचारी
नए प्रस्ताव में कर्मचारियों को सप्ताहिक अवकाश को लेकर अधिक विकल्प देने की बात कही गई है। साथ ही काम के घंटों को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए जाएंगे, जिससे कर्मचारियों और संस्थानों दोनों को सुविधा मिल सके।
व्यापार शुरू करना होगा आसान
यदि कोई नई दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलना चाहता है तो उसे कई स्तर की प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। प्रस्ताव के अनुसार एकल आवेदन के माध्यम से प्रक्रिया को सरल बनाने की तैयारी है।
दुकानें और प्रतिष्ठान ज्यादा समय तक खुल सकेंगे
नए एक्ट के लागू होने के बाद कुछ श्रेणी के प्रतिष्ठानों को अधिक समय तक संचालन की अनुमति मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और काम के नए विकल्प बनने की संभावना जताई जा रही है।
कौन-कौन से कानून होंगे समाप्त?
सरकार जिन प्रमुख कानूनों को समाप्त कर नए एक्ट में समाहित करने की तैयारी कर रही है, उनमें मध्य प्रदेश इन्सॉल्वेंसी एक्ट 1946, औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960, औद्योगिक रोजगार अधिनियम 1961, श्रम कल्याण निधि से जुड़े कानून और असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम जैसे प्रावधान शामिल हैं।
क्या है सरकार का उद्देश्य?
सरकार का कहना है कि अलग-अलग कानूनों के कारण कई बार प्रक्रियाएं जटिल हो जाती हैं। सिंगल एक्ट के जरिए श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा, उद्योगों को आसान अनुपालन और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
कर्मचारी और प्रतिष्ठान दोनों पर फोकस
अधिकारियों के अनुसार नए कानून में केवल संस्थानों ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के हितों को भी बराबर महत्व देने की कोशिश की जा रही है। इसी उद्देश्य के साथ श्रम व्यवस्था को अधिक संतुलित और सरल बनाने की तैयारी की जा रही है।