MP Politics : भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। बीजेपी ने मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को तीसरा उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। इस फैसले के बाद तीसरी सीट पर मुकाबला तय माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस खेमे में भी हलचल तेज हो गई है।
तीसरी सीट पर अब होगा सीधा मुकाबला
मुख्यमंत्री निवास में देर रात तक चली बैठक के बाद बीजेपी ने महेश केवट के नाम पर मुहर लगाई। इसके साथ ही साफ हो गया कि राज्यसभा की तीसरी सीट पर निर्विरोध चुनाव नहीं होगा, बल्कि वोटिंग के जरिए फैसला होगा।
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महेश केवट के नाम पर क्यों बनी सहमति?
उम्मीदवार चयन के दौरान ओबीसी, एससी-एसटी और आदिवासी वर्ग के कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन अंत में पिछड़ा वर्ग से आने वाले महेश केवट पर सहमति बनी। वे वर्तमान में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
कांग्रेस के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, लेकिन विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर हाईकोर्ट की रोक है। वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि वे बीजेपी के साथ हैं। ऐसे में कांग्रेस की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं दिख रही।
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बीजेपी के पास कितनी है अतिरिक्त ताकत?
बीजेपी के 164 विधायक हैं। दो सीटें जीतने के बाद भी उसके पास 48 वोट अतिरिक्त बचते हैं। अगर निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश डोडियार का समर्थन मिलता है तो यह आंकड़ा 50 तक पहुंच सकता है। ऐसे में तीसरी सीट के लिए बीजेपी को सिर्फ 8 और वोटों की जरूरत होगी।
बाड़बंदी तक पहुंच सकता है मामला
बीजेपी की रणनीति को देखते हुए कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़बंदी कर सकती है। जरूरत पड़ने पर उन्हें दूसरे राज्य में भी भेजा जा सकता है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का दावा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और क्रॉस वोटिंग की कोई संभावना नहीं है।
कौन हैं महेश केवट?
निवाड़ी जिले के ओरछा से आने वाले महेश केवट को हाल ही में 6 मई को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था। वे बीजेपी में जिला उपाध्यक्ष, जिला मंत्री और राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य जैसी जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं।
