India Share Market Ranking : नई दिल्ली। भारत को शेयर बाजार के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। मार्केट कैपिटलाइजेशन यानी शेयर बाजार की कुल वैल्यू के मामले में भारत अब दुनिया में सातवें नंबर पर पहुंच गया है। पहले ताइवान और अब दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चिप बनाने वाली कंपनियों में तेज निवेश की वजह से इन देशों को फायदा मिला है, जबकि भारतीय बाजार कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
भारत की रैंकिंग क्यों गिरी?
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण कोरिया की शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों की कुल वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गई है। वहीं भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर करीब 4.84 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। कुछ दिन पहले ही ताइवान भी भारत से आगे निकल गया था। इसका मतलब है कि लगातार दो हफ्तों में दो एशियाई देशों ने भारत को पीछे छोड़ दिया है।
एआई और चिप कंपनियों ने बदली तस्वीर
दक्षिण कोरिया और ताइवान की बढ़त के पीछे सबसे बड़ी वजह एआई और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री है। सैमसंग, एसके हाइनिक्स और टीएसएमसी जैसी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है। दुनिया भर में एआई टेक्नोलॉजी की मांग बढ़ रही है और इन कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। निवेशक भी ऐसे देशों में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं जहां एआई और चिप सेक्टर मजबूत है।
भारत के सामने क्या चुनौतियां हैं?
भारत में पिछले कुछ महीनों से शेयर बाजार दबाव में है। विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं। रुपये की कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कंपनियों की धीमी कमाई ने भी बाजार को प्रभावित किया है। इसके अलावा भारत में अभी ऐसी बड़ी एआई या सेमीकंडक्टर कंपनियां नहीं हैं जो वैश्विक निवेशकों को बड़े स्तर पर आकर्षित कर सकें।
Bihar Viral Video : 34 साल पुराने केस में बुजुर्ग दोषी, जवानी में चली गोली बुढ़ापे में आया फैसला
विदेशी निवेशक क्यों निकाल रहे हैं पैसा?
इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 24 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। निवेशकों का फोकस अब एआई, डेटा सेंटर और चिप बनाने वाली कंपनियों पर है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इन हाई-टेक सेक्टरों में देश अभी पीछे माना जाता है। यही वजह है कि वैश्विक निवेशकों का रुझान दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों की तरफ बढ़ रहा है।
महंगे तेल और वैश्विक तनाव का असर
दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारत पर भी पड़ रहा है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ सकती है और कंपनियों की लागत भी बढ़ती है। इससे कई सेक्टरों के मुनाफे पर दबाव बन सकता है। ऑटोमोबाइल, एयरलाइंस, केमिकल और पैकेजिंग सेक्टर को सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है।
आगे क्या करना होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को एआई, सेमीकंडक्टर और नई तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से निवेश बढ़ाना होगा। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बाजार को मजबूती मिलेगी। भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत मानी जाती है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए नई तकनीक वाले क्षेत्रों में तेजी से काम करना जरूरी होगा।
भारत का शेयर बाजार फिलहाल चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। हालांकि देश की आर्थिक विकास दर मजबूत है, लेकिन एआई और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के सेक्टरों में कमजोर मौजूदगी का असर बाजार पर दिख रहा है। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में निवेश और सुधार भारत को फिर से मजबूत स्थिति में ला सकते हैं।