Manoj Dhakad : भोपाल। हौसले बुलंद हो तो किस्मत की लकीरे भी घुटने टेक देती हैं ऐसा ही कुछ कर दिखाया है मध्य प्रदेश के चंबल की मिट्टी से निकले एक जांबाज ने। श्रीलंका के कोलंबो मे आयोजित भारत बनाम श्रीलंका 2026 अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट 3 3T-20 चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने मेजबान देश को 3-0 से रौंदकर क्लीन स्वीप किया है। इस ऐतिहासिक और गौरवमयी जीत के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे हैं मुरैना के मनोज धाकड़, जिन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को पीछे छोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है।
मुरैना के छोटे से गांव से कोलंबो तक का सफर
मुरैना जिले की कैलारस तहसील के एक बेहद छोटे से गांव ‘खेरा मानगढ़’ के रहने वाले मनोज धाकड़ की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। एक दर्दनाक हादसे में अपने दोनों पैर गंवाने के बाद मनोज ने हार नहीं मानी। उन्होंने बैसाखियों और व्हीलचेयर को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया।
कप्तान कबीर भदौरिया के नेतृत्व वाली भारतीय टीम में मध्य प्रदेश से तीन खिलाड़ियों को जगह मिली थी, जिनमें से मनोज ने अपनी धाकड़ बल्लेबाजी, शानदार गेंदबाजी और मुस्तैद फील्डिंग के दम पर पूरी सीरीज में विरोधी टीम के छक्के छुड़ा दिए।
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कप्तान कबीर की अगुवाई में भारत की ‘क्लीन स्वीप’
भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम ने पूरी सीरीज के दौरान श्रीलंका को पनपने का एक भी मौका नहीं दिया। खेल के तीनों विभागों में भारतीय शेरों ने मेजबान टीम को हर मोर्चे पर पछाड़ा। कप्तान कबीर भदौरिया की बेहतरीन कप्तानी और मनोज धाकड़ के उम्दा प्रदर्शन की बदौलत भारत ने गुरुवार को सीरीज का आखिरी मैच जीतकर 3-0 से ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया।
इंटरनेशनल चैंपियन के स्वागत में पलक-पावड़े बिछाएगा चंबल
श्रीलंका की धरती पर तिरंगा लहराने के बाद अब मनोज धाकड़ ‘इंटरनेशनल चैंपियन’ का खिताब अपने सीने पर सजाकर स्वदेश लौट रहे हैं। चंबल के इस लाडले के स्वागत के लिए मुरैना और उनके गृह ग्राम खेरा मानगढ़ में जश्न का माहौल है।
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ढोल-नगाड़ों और भव्य जुलूस के साथ उनके स्वागत की ऐतिहासिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। देश के इस जांबाज बेटे ने यह साबित कर दिया है कि चंबल की माटी में सिर्फ संघर्ष नहीं, बल्कि देश का नाम रौशन करने वाले चैंपियन भी पैदा होते हैं।
