Iran-Israel War Update : तेहरान। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान को अब वॉशिंगटन पर भरोसा नहीं रहा और वह संभावित नए युद्ध की तैयारी में जुट गया है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत बताया है। यही समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में तेल सप्लाई का मुख्य मार्ग माना जाता है। इसी वजह से अब यह इलाका वैश्विक राजनीति और सुरक्षा का केंद्र बन गया है।
ईरान ने सैन्य तैयारी की तेज
रिपोर्ट के अनुसार ईरानी सरकार तीन बड़े मोर्चों पर काम कर रही है। इनमें सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन और कूटनीतिक रणनीति शामिल है। ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
हालांकि बातचीत का रास्ता अभी बंद नहीं किया गया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी हालात के लिए तैयार रहने का दावा कर रही हैं। ईरानी नेतृत्व ने साफ कहा है कि अगर संघर्ष बढ़ा तो अमेरिका के सैन्य ठिकानों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।
IRGC ने भी हाल ही में चेतावनी दी थी कि किसी नए अमेरिकी हमले का जवाब पहले से ज्यादा खतरनाक होगा। ईरान का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट के जरिए वह अमेरिका और उसके सहयोगियों पर बड़ा दबाव बना सकता है।
अमेरिकी ड्रोन और लड़ाकू विमानों को लेकर बड़ा दावा
तनाव के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसकी सेना ने अमेरिकी MQ-9B और RQ-4 ड्रोन को निशाना बनाया। इसके अलावा ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसे एक F-35 लड़ाकू विमान पर भी फायरिंग की गई। हालांकि अमेरिका की तरफ से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी तरफ अमेरिका ने भी होर्मुज स्ट्रेट के पास कार्रवाई की। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना ने उन ईरानी बोट्स को निशाना बनाया जो समुद्री इलाके में बारूदी सुरंग बिछा रही थीं। इसके अलावा बंदर अब्बास के कुछ मिसाइल ठिकानों पर भी हमले किए गए। अमेरिकी सेंटकॉम ने इसे आत्मरक्षा की कार्रवाई बताया है।
इंटरनेट बहाली और ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर
ईरान में 88 दिनों बाद इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बहाल हुई हैं। नेटब्लॉक्स ने इसे आधुनिक इतिहास का सबसे लंबा राष्ट्रीय इंटरनेट ब्लैकआउट बताया। लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से कारोबार, बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं पर बड़ा असर पड़ा।
तेहरान के बाजारों में भी चिंता का माहौल है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि सामान की सप्लाई प्रभावित हुई है और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतें लगातार बदल रही हैं। युद्ध जैसे हालात, बंदरगाहों की नाकेबंदी और अमेरिकी दबाव की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरों से ईरानी मुद्रा में इस सप्ताह पांच प्रतिशत से ज्यादा मजबूती देखी गई।
इजराइल और लेबनान सीमा पर बढ़ी हलचल
इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के करीब 50 शहरों और गांवों को खाली करने की चेतावनी जारी की है। इनमें नबातियेह शहर भी शामिल है। इजराइली सेना ने कहा कि इन इलाकों में जल्द सैन्य कार्रवाई हो सकती है। लोगों को जाहरानी नदी के उत्तर की ओर जाने के लिए कहा गया है।
इसके साथ ही इजराइल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा अधिकारियों के साथ सुरक्षा बैठक की और उत्तरी सीमा की स्थिति की समीक्षा की। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि इजराइल किसी बड़े संघर्ष की आशंका को लेकर सतर्क है।
गाजा में हमास के नए सैन्य प्रमुख पर हमला
गाजा में इजराइल ने हमास के नए सैन्य प्रमुख मोहम्मद ओदेह को निशाना बनाकर बड़ा हवाई हमला किया। यह हमला गाजा सिटी के रमल इलाके में किया गया, जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए।
इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस हमले में मोहम्मद ओदेह मारे गए हैं, हालांकि हमास ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। इजराइली सरकार का कहना है कि ओदेह 7 अक्टूबर 2023 के हमलों में शामिल था और हाल ही में उसे हमास की सैन्य शाखा की जिम्मेदारी दी गई थी।
न्यूयॉर्क में इजराइली सामान के बहिष्कार को समर्थन
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में इजराइली सामान के बहिष्कार को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। ब्रुकलिन के पार्क स्लोप फूड कोऑप में वोटिंग के दौरान 67 प्रतिशत सदस्यों ने इजराइली प्रोडक्ट्स के बहिष्कार के पक्ष में मतदान किया।
इस दौरान 4,780 लोगों ने समर्थन किया जबकि 1,796 लोगों ने इसका विरोध किया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब गाजा युद्ध को लेकर अमेरिका में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
UAE परमाणु प्लांट हमले पर UN की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने UAE के बराकाह परमाणु प्लांट पर हुए हमले की निंदा की है। UN ने कहा कि परमाणु ठिकानों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। हालांकि परिषद ने किसी देश या संगठन का नाम नहीं लिया।
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UAE ने दावा किया था कि इराक की दिशा से छह ड्रोन भेजे गए थे, जिनमें से एक ड्रोन परमाणु प्लांट तक पहुंच गया था और वहां आग लग गई थी। इस घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।