हाइलाइट्स
- हाईकोर्ट फैसले के बाद पहली बार CM मोहन यादव भोजशाला पहुंचे।
- मुख्यमंत्री ने मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
- भोजशाला को 150 करोड़ रुपए से “सरस्वती लोक” के रूप में विकसित किया जाएगा।
CM Mohan Yadav Bhojshala Visit : धार। इंदौर हाईकोर्ट द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को मंदिर मानने के फैसले के बाद सोमवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहली बार भोजशाला पहुंचे। यहां उन्होंने मां वाग्देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर भोजशाला परिसर को विशेष रूप से फूलों और सजावट से सजाया गया था। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मुख्यमंत्री ने मां वाग्देवी की आरती कर पुष्प अर्पित किए। इस मौके को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भोजशाला परिसर में लिया ऐतिहासिक जानकारी का जायजा
मुख्यमंत्री करीब 20 मिनट तक भोजशाला परिसर में मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने परिसर के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण किया और वहां मौजूद हिंदू प्रतीक चिन्हों व ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से धार पहुंचे थे, जहां से कारकेड के जरिए राजवाड़ा पहुंचे और फिर रोड शो करते हुए भोजशाला पहुंचे।
रास्ते भर लोगों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी उनके साथ मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भोजशाला केवल आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
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‘सरस्वती लोक’ के रूप में विकसित होगी भोजशाला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोजशाला और आसपास के क्षेत्र को करीब 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार भोजशाला को “सरस्वती लोक” के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।
यहां भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत अध्ययन, वेद शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थान शिक्षा, चिकित्सा और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी विकास का केंद्र बनेगा। सरकार का उद्देश्य भोजशाला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाना है।
मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने की मांग
धार विधायक नीना वर्मा ने मुख्यमंत्री के सामने राजा भोज संस्कृत पीठ की स्थापना और लंदन में मौजूद मां वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि सरकार न्यायालय के निर्णयों के अनुसार हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि धार और भोजशाला प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर हैं और इनके संरक्षण तथा विकास के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का भी आभार व्यक्त किया।
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वैदिक मंत्रों और अखंड ज्योत से बदला माहौल
भोजशाला परिसर का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका है। गर्भगृह में मां वाग्देवी की प्रतीक प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है और मैहर से लाई गई अखंड ज्योत लगातार प्रज्वलित है। पहली बार सूर्योदय से सूर्यास्त तक यहां वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दी।
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग भोजशाला पहुंचे। मुख्यमंत्री ने इसके बाद रोड शो और जनसभा में हिस्सा लिया तथा “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत मुंज सागर तालाब पर श्रमदान भी किया।
भोजशाला बना राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र
धार की भोजशाला एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। हाईकोर्ट के फैसले और मुख्यमंत्री के दौरे के बाद इसे धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की विकास योजनाएं जमीन पर उतरती हैं तो भोजशाला आने वाले समय में देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में शामिल हो सकती है।