NCRB Report 2024 : भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़क हादसों के बढ़ते आंकड़ों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, हिट एंड रन मामलों में मध्य प्रदेश देश का दूसरा सबसे खतरनाक राज्य बन गया है। प्रदेश में एक साल के भीतर 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है। लगातार बढ़ते हादसे ट्रैफिक व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
हिट एंड रन मामलों में मप्र दूसरे नंबर पर
एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में मध्य प्रदेश में हिट एंड रन के 9,260 मामले दर्ज किए गए। इन हादसों में 10,130 लोगों की मौत हुई। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में हर दिन औसतन 27 लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई।
अगर प्रति घंटे के हिसाब से देखें तो हर घंटे एक से ज्यादा व्यक्ति की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। इस सूची में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है, जबकि मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।
रैश ड्राइविंग के मामलों ने बढ़ाई परेशानी
प्रदेश में तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में रैश ड्राइविंग के 19,658 मामले दर्ज हुए। इन घटनाओं में 20,693 लोग हादसों का शिकार बने।
देशभर में दर्ज कुल मामलों में बड़ी हिस्सेदारी अकेले मध्य प्रदेश की रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ी वजह है।
अन्य सड़क हादसों में भी हजारों मौतें
हिट एंड रन मामलों के अलावा सामान्य सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति भी बेहद गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में अन्य सड़क हादसों के 4,682 मामले सामने आए। इन घटनाओं में 5,310 लोगों की जान चली गई। लगातार बढ़ते हादसे यह संकेत दे रहे हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर अभी भी बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है।
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हजारों लोग घायल और प्रभावित
दूसरों की जान जोखिम में डालकर वाहन चलाने के मामलों में भी मध्य प्रदेश के आंकड़े चिंताजनक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे 20,307 मामले दर्ज किए गए। इन घटनाओं में 22 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए या प्रभावित हुए। घायलों के मामलों में भी मध्य प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताई बड़ी वजह
ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवरस्पीडिंग और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी है। हाईवे पर कमजोर निगरानी, हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमों का पालन नहीं करना और ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में खामियां भी दुर्घटनाओं को बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल चालान काटने से हालात नहीं सुधरेंगे। सड़क इंजीनियरिंग, बेहतर मॉनिटरिंग, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और ड्राइवर व्यवहार सुधार पर एक साथ काम करने की जरूरत है।